मंडी. हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में चंद घंटे के लिए खुलने के बाद चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे फिर से बंद हो गया है और इस बार जल्द बहाली के आसार कम ही नजर आ रहे हैं. उधर, बनाला के पास देर रात को बड़ा लैंडस्लाइड भी हुआ है और यहां पर कई गाड़ियां दबने की अफवाह फैली है. जबकि अब तक यहां पर ऐसी अनहोनी की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है.
हालांकि, मंडी की सांसद कंगना रनौत ने बड़ा दावा किया है और कहा कि मंडी के बनाला के पास हुए भीषण हादसे का समाचार अत्यंत दु:खद है. पहाड़ धंसने से कई लोग और वाहनों के मलबे में दबे होने की आशंका है. मैं प्रभावित परिवारों के साथ हूं और प्रशासन से लगातार संपर्क में हूं. राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है.ईश्वर सभी को सुरक्षित रखें और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करती हूं.
उधर, एसपी मंडी साक्षी वर्मा ने कंगना रनौत के गाड़ियां दबने के दावे का खंडन किया है. एसपी ने बताया कि मलबा हटाने के लिए प्रशासन की मशीनरी दबी मलबा हटाने में लगी है. एसपी ने बताया कि अब तक कोई प्रत्यक्षदर्शी या किसी शख्स ने उसके करीबियों की लापता होने की सूचना नहीं दी है और ना ही जितना मलबा अब तक निकाला गया है, उसमें कुछ मिला है. एसपी ने कहा कि मलबा हटाने के बाद ही सारी स्थिति साफ हो पाएगी और ऐसे में जो जानकारी सामने आएगी उसे सांझा कर दिया जाएगा.
दरअसल पंडोह डैम के साथ लगते कैंची मोड़ के पास नेशनल हाईवे पूरी तरह से धंस गया है. यहां अब पैदल चलने के लिए भी रास्ता नहीं बचा है. बीती रात को क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण यहां हाईवे का एक बड़ा भाग पूरी तरह से जमींदोज हो गया.

मंडी की सांसद कंगना रनौत ने बड़ा दावा किया है.
हालांकि हाईवे बीती रात को बनाला के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण पहले से ही बंद था और बड़े मालवाहक वाहनों को 9 मील के पास रोक कर रखा गया था. बनाला में हाईवे को गुरुवार को बहाल करना था लेकिन उससे पहले कैंची मोड़ के पास यह हाईवे बूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. बनाला में गिरे पत्थरों को तो आज हटा दिया जाएगा लेकिन कैंची मोड़ के पास क्षतिग्रस्त भाग की मुरम्मत करने या फिर वैकल्पिक मार्ग तैयार करने में अभी लंबा समय लग सकता है. गौर रहे कि पिछले कल ही यह हाईवे दवाड़ा के पास तीन दिनों बाद बहाल हुआ था.
उधर, मंडी से कुल्लू जाने लिए छोटी काशी से कमांद होते हुए जा सकते हैं. हालांकि, य़ह मार्ग केवल छोटी गाड़ियों के लिए खुला है. बीती शाम को उपायुक्त अपूर्व देवगन ने मंडी से बजौरा वाया कमांद सड़क का निरीक्षण भी किया था. मंडी से कुल्लू के लिए इस वैकल्पिक सड़क पर रोपा और राहला के बीच, पायल, कन्नौज, मरोगी में बहुत भूस्खलन हुआ था, जो कि बहाल हो गया है. फिलहाल, मंडी से कुल्लू तक हल्के वाहन एकतरफ़ा चल रहे हैं. लेकिन उन्हें एक तरफ से बारी बारी छोड़ा जा रहा है.
कैंची मोड़ के साथ लगते दयोड़ गांव के लोगों ने बताया कि आधी रात को बारिश का तांडव देखकर वो सहम गए थे. स्थानीय निवासी यादवेंद्र ठाकुर ने बताया कि मूसलाधार बारिश के बीच धमाकों की ऐसी आवाजें आ रही थी कि मानों सबकुछ तहस-नहस हो रहा हो. बारिश इतनी ज्यादा थी कि उसमें छाता लेकर जाने की संभावना भी नहीं थी. देखते ही देखते कैंची मोड़ के पास नेशनल हाईवे ताश के पत्तों की तरह बह गया. उन्होंने बताया कि बारिश का ऐसा भयानक रूप इससे पहले कभी नहीं देखा.
तीन वाहन आए चपेट में, भागकर बचाई जानें, सैंकड़ों वाहन फंसे हुए हैं हाईवे पर
रात को हुई मूसलाधार बारिश के बीच हाईवे गुजर रहे वाहनों में से तीन वाहन जगह-जगह गिरे मलबों की चपेट में आ गए. एक वाहन चालक मलबे से बचने के लिए गाड़ी को बैक करते समय नाली में जा घुसा. हालांकि तीनों वाहनों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है और लोग भी सुरक्षित हैं. वाहन चालकों ने बताया कि यह मंजर भयानक था और उन्होंने भागकर अपनी जानें बचाई हैं। हाईवे बंद होने के कारण दोनों तरफ सैंकड़ों वाहन फंसे हुए हैं.
हाईवे को बहाल करने का कार्य जारी
पंडोह पुलिस चौकी के प्रभारी अनिल कटोच ने बताया कि कैंची मोड़ के पास जहां हाईवे धंसा है वहां पर मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है. मलबे को हटाने के बाद यहां अस्थाई मार्ग बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा. यहां प्रशासन और एनएचएआई की टीमें आकर स्थिति का आंकलन करने के बाद ही यह तय कर पाएंगी कि हाईवे को किस तरह से बहाल किया जाना है, लेकिन नुकसान बहुत ज्यादा है और इसे बहाल करने में अभी समय लग जाएगा। मंडी से पंडोह तक हाईवे यातायात के लिए पूरी तरह से सुचारू है.
2023 में भी 8 महीने बंद रहा था हाईवे
उधर, पंडौह में जिस स्थान पर अभी हाईवे धंसा है, उसके साथ लगते एक अन्य स्थान पर वर्ष 2023 की आपदा में भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला था जब हाईवे का एक बहुत बड़ा हिस्सा धंसकर पंडोह डैम में समा गया था. यहां हाईवे को फिर से बनाने और इसे बहाल करने में 8 महीनों का समय लग गया था. आवागमन के लिए पुराने मार्ग को दुरूस्त करते हुए उसे बहाल किया गया था. लेकिन अब जहां पर धंसाव हुआ है वहां पर तो ऐसे किसी मार्ग की कोई संभावना भी नजर नहीं आ रही है. यदि जल्द ही कोई वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं किया गया तो कुल्लू मनाली के लिए आने-जाने का एक मात्र रास्ता वाया कटौला ही रह जाएगा.




