भोपाल। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए क्षेत्रीय संभागीय कार्यालयों में पदस्थ उन संविदा कर्मियों के लिए समकक्षता वेतन निर्धारण के आदेश जारी कर दिए हैं, जो पिछली बार इस लाभ से वंचित रह गए थे। लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस आदेश से प्रदेश के कई ऐसे संविदा कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से नियमित कर्मचारियों के समान वेतन की मांग कर रहे थे।
विभागीय निर्णय के अनुसार, अब क्षेत्रीय कार्यालयों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर, वाहन चालक, भृत्य, चौकीदार और स्वीपर सहित अन्य चतुर्थ श्रेणी एवं तकनीकी कर्मचारियों को नियमित पदों के अनुरूप न्यूनतम वेतन का लाभ प्रदान किया जाएगा।
लंबे समय से लंबित था मामला
म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 22 जुलाई 2023 को संविदा नीति के तहत नियमित पदों के समान न्यूनतम वेतन, अनुकंपा नियुक्ति और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद सितंबर 2023 में पैरामेडिकल स्टाफ का वेतन निर्धारण तो कर दिया गया, लेकिन संभागीय कार्यालयों के चतुर्थ श्रेणी और अन्य तकनीकी कर्मचारी इस दायरे से बाहर रह गए थे।
राठौर ने बताया कि इस विसंगति को लेकर महासंघ ने लगातार उच्च स्तर पर पत्राचार और ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग उठाई। महासंघ के प्रयासों का ही परिणाम है कि अब स्वास्थ्य विभाग ने उन सभी छूटे हुए कर्मचारियों के लिए भी समकक्षता वेतन निर्धारण के आदेश जारी कर दिए हैं।
इस निर्णय से प्रदेश के विभिन्न संभागीय कार्यालयों में तैनात सैकड़ों संविदा कर्मियों को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी और उनका मनोबल बढ़ेगा। महासंघ ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है।




