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एम्स के डॉक्टर्स ने की नासाग्रसनी के विशेष ग्रंथि की खोज, कई बीमारियों को पहचानने में होगी आसानी

AIIMS भोपाल के वैज्ञानिकों का कमाल: इंसान के शरीर में खोजी नई ग्रंथि, अब बदल जाएगा मेडिकल साइंस का इतिहास!

भोपाल | 1 मार्च, 2026 रिपोर्ट: अग्रसर इंडिया

चिकित्सा जगत में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसी खबर आई है जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। एम्स (AIIMS) भोपाल के वैज्ञानिकों ने मानव शरीर के अंदर एक नई ग्रंथि (Gland) और उसकी निकासी नलिका (Duct) की खोज की है। यह खोज इतनी बड़ी है कि इसे शरीर रचना विज्ञान (Anatomy) में एक नई कड़ी माना जा रहा है।

Highlights: मेडिकल साइंस की बड़ी कामयाबी

  • नई ग्रंथि की खोज: नाक के पीछे और गले के ऊपरी हिस्से (नासाग्रसनी) में मिली नई ग्रंथि।

  • अज्ञात नलिका प्रमाणित: पहली बार इस ग्रंथि से जुड़ी डक्ट को वैज्ञानिक रूप से साबित किया गया।

  • इंटरनेशनल पहचान: प्रतिष्ठित ‘Journal of Anatomy’ में प्रकाशित हुआ यह शोध।

  • कैंसर इलाज में मदद: इस खोज से सिर और गर्दन के कैंसर के इलाज में मिलेगी बड़ी सफलता।


कहाँ छिपी थी यह ग्रंथि?

एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने आधुनिक जांच तकनीकों के जरिए नाक के बिल्कुल पीछे और गले के सबसे ऊपरी हिस्से, जिसे नेजोफैरिंक्स (Nasopharynx) कहा जाता है, वहां इस विशेष ग्रंथि को ढूंढ निकाला है। वैज्ञानिकों ने न केवल इसकी स्थिति का पता लगाया, बल्कि इसकी सटीक संरचना और आसपास के अंगों के साथ इसके संबंध का भी सूक्ष्म अध्ययन किया है।

मरीजों को कैसे होगा फायदा?

यह खोज केवल किताबी नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा:

  1. सटीक सर्जरी: सिर और गर्दन की सर्जरी अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित होगी।

  2. बेहतर रेडियोथेरेपी: कैंसर के इलाज के दौरान डॉक्टर अब महत्वपूर्ण ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुँचाए बिना सटीक रेडिएशन दे सकेंगे।

  3. मेडिकल इमेजिंग: एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी जांचों में बीमारियों की पहचान अब और भी बारीकी से हो पाएगी।

इन दिग्गजों ने किया करिश्मा

इस शोध दल में प्रो. सुनीता अरविंद अठावले, प्रो. शीतल कोटगिरवार, प्रो. मनाल एम. खान, प्रो. अंशुल राय, प्रो. दीप्ति जोशी और प्रो. डॉ. रेखा लालवानी जैसे दिग्गज शामिल रहे। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर ने इसे संस्थान की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।


बड़ी बात: इंसान के शरीर में अंगों की खोज सदियों से हो रही है, ऐसे में 2026 में एक नई ग्रंथि का मिलना भोपाल के वैज्ञानिकों की काबिलियत का लोहा मनवाता है।

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