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मिला इंसानी मल और खतरनाक बैक्टीरिया, NGT ने जताई नाराजगी

 

भोपाल। भोपाल के पांच तालाबों के पानी में इंसान और जानवरों के मल से जुड़े खतरनाक फीकल कालिफार्म बैक्टीरिया पाए जाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। जांच में पानी में फीकल कालिफार्म की मात्रा 1600 पाई गई, जबकि मानकों के अनुसार इसकी मात्रा शून्य होनी चाहिए।

एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने नूर अहमद खान और कमल कुमार राठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र की घटना को गंभीर बताया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पेयजल में ई-कोलाई, फीकल कालिफार्म और कॉलरा जैसे बैक्टीरिया की मौजूदगी यह दर्शाती है कि सीवेज का पानी पेयजल पाइपलाइनों में प्रवेश कर गया है।

आदेश के अनुसार, छोटा तालाब, शाहपुरा झील, मोतिया तालाब, मुंशी हुसैन खान तालाब और सिद्दीकी हसन तालाब के पानी में फीकल कालिफार्म पाया गया। एनजीटी ने कहा कि इन तालाबों से सप्लाई किए जा रहे पानी से पांच लाख से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है। हालांकि नगर निगम का दावा है कि इन तालाबों का पानी शहर में सप्लाई नहीं किया जाता और केवल बड़े तालाब का पानी ही पेयजल के लिए उपयोग में लिया जाता है।

प्रदेश के अन्य शहरों में भी खतरा

एनजीटी ने कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती है। भोपाल के अलावा खरगोन, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और सतना जैसे शहरों में भी इसी तरह के प्रदूषण और जोखिम सामने आए हैं। ट्रिब्यूनल ने बताया कि कई जगहों पर पेयजल और सीवेज पाइपलाइनें बेहद पास बिछी हैं। लीकेज, कम दबाव और अनियमित आपूर्ति के कारण दूषित पानी पाइपलाइनों में घुस रहा है। पानी की नियमित जांच और ओवरहेड टैंकों की सफाई न होना भी बड़ी लापरवाही है।

मामले की जांच और निगरानी के लिए एनजीटी ने एक संयुक्त समिति गठित की है, जो छह सप्ताह में रिपोर्ट सौंपेगी। राज्य सरकार और सभी नगर निगमों से जवाब तलब किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।

एनजीटी के निर्देश

पेयजल से जुड़ी शिकायतों के लिए मोबाइल ऐप विकसित किया जाए

सभी पाइपलाइन लीकेज तुरंत ठीक किए जाएं

जलस्रोतों से अतिक्रमण हटाया जाए

पानी की नियमित क्लोरीनेशन अनिवार्य की जाए

सभी जल कनेक्शनों पर मीटर लगाए जाएं

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को सख्ती से लागू किया जाए

मूर्ति विसर्जन के लिए जलाशयों का उपयोग रोका जाए

नगर निगम का पक्ष

महापौर मालती राय ने कहा कि शहर में इन पांचों तालाबों का पानी पेयजल के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। पुराने शहर में केवल बड़े तालाब के पानी की आपूर्ति होती है, जिससे शहर की करीब 30 प्रतिशत आबादी को पानी मिलता है।

 

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