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पुराने भोपाल में चार दशक पुरानी पाइपलाइन जर्जर, रसोई तक पहुंच रहा सीवर मिला पानी

 

भोपाल। भोपाल नगर निगम द्वारा राजधानी को स्मार्ट सिटी और सबसे स्वच्छ शहर बनाने के दावे किए जाते रहे, लेकिन शहर की जलापूर्ति आज भी चार–पांच दशक पुराने ढांचे पर टिकी है। जबकि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत’ योजना का उद्देश्य शहरों में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करना था, लेकिन भोपाल में यह योजना आधे-अधूरे काम और गलत प्राथमिकताओं की भेंट चढ़ गई। इसका हर्जाना शहर का हर आम नागरिक भुगत रहा है। पुराने शहर के कई इलाकों में सीवेज और पानी की पाइप लाइन एक साथ डली हुई है।

ऐसे में जो पानी आपकी रसोई तक पहुंच रहा है, वह जरूरी नहीं है कि पूरी तरह साफ हो। यहीं कारण है कि शहर के नागरिकों को पेट से संबंधित बीमारियों ने घेर रखा है। डाक्टर भी मानते हैं कि 80 फीसद बीमारियां पानी की वजह से होती है। चूंकि इंदौर में दूषित पानी पीकर 20 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी राजधानी की पेजयल और सीवेज व्यवस्था में सुधार नहीं किया जा रहा है। मामला गरम है, इसलिए नगर निगम लीकेज सुधार और सीवेज चैंबर की सफाई का दिखावा कर रहा है।

 

500 करोड़ से अधिक खर्च

अमृत 1.0 के तहत शहर में लगभग 500 करोड़ से अधिक राशि खर्च हो चुकी है। अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत 582 करोड़ रुपये के कार्यों का लक्ष्य रखा गया है। इतनी मोटी रकम खर्च होने के बाद भी शहर के 35 से 40 प्रतिशत इलाके ऐसे हैं, जहां 1980–90 के दशक में डाली गई लाइन को अब तक बदला नहीं गया है। जबकि उस समय डाल गई पाइप लाइन की उम्र 20 से 25 साल होती है। ये दोगुना से ज्यादा समय से चल रही हैं। जिससे यह अब जर्जर हो चुकी है।

शहर के यह इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित

पुराने शहर के जहांगीराबाद, बुधवारा, इतवारा, शाहजहांनाबाद, भोपाल टाकीज, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, बैरागढ़ क्षेत्र, करोंद, छोला, मंगलवारा, फतेहगढ़, चौक बाजार। यहां अक्सर मटमैला, बदबूदार और कभी सीवर जैसे पानी की शिकायत रहती है।

कागजों में सुधार, जमीन पर पैचवर्क

अमृत 1.0 के तहत शहर की पाइपलाइन बदलने का काम अब तक अधूरा है। वहीं दूसरी ओर नए इलाकों में डीआई पाइप बिछाने का काम चल रहा है। पंपिंग स्टेशन और टंकियों के अलावा घनी आबादी वाले कुछ पुराने वार्ड नजरअंदाज कर दिए हैं। प्रोजेक्ट शहर में सिस्टम रिफार्म की जगह पैचवर्क योजना बनकर रह गई।

दूषित पानी बना बीमारियों का कारण

शहर की 80 प्रतिशत आबादी पेट दर्द की समस्या से जूझ रही है, जिसका कारण दूषित जल का सेवन है। अशुद्ध पानी से टाइफाइड, हैजा (कालरा) और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियां हो सकती हैं। दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया पेट में संक्रमण पैदा करते हैं, जिससे दस्त, ऐंठन और उल्टी की समस्या होती है। बचाव के लिए पानी उबालकर पिएं, क्लोरीन की गोलियों का उपयोग करें। जल स्रोतों की स्वच्छता का ध्यान रखें। – डॉ. प्रणव रघुवंशी, गैस्ट्रो एंटेरोलाजिस्ट

ये हिस्से ज्यादा प्रभावित

  • अरेरा कॉलोनी, एमपी नगर जोन-1 व 2 के पुराने हिस्से भी प्रभावित हैं। यहां पाइपलाइन पुरानी होने के साथ बार-बार लीकेज और प्रेशर फ्लक्चुएशन की वजह से गंदा पानी आ जाता है।
  • रेलवे स्टेशन, करोंद, छोला बेल्ट, भोपाल रेलवे स्टेशन क्षेत्र, करोंद के पुराने वार्ड छोला विश्राम घाट क्षेत्र सुभाष नगर के पुराने हिस्से। इन इलाकों में सीवर ओवरफ्लो और लो प्रेशर सप्लाई के समय सीवर का पानी मिलने की शिकायतें ज्यादा होती है।
  • बैरागढ़ यहां जर्जर जीआई पाइप, अवैध कनेक्शन के कारण पानी का रंग पीला या मटमैला आता है।
  • झुग्गी और घनी आबादी वाले इलाके, कबाड़खाना क्षेत्र, नवजीवन कॉलोनी, काजी कैंप, सुभाष नगर झुग्गी क्षेत्र। यहां अक्सर अस्थायी पाइप खुले में डाली गई लाइनें सीधे नालियों और सीवर के संपर्क में रहती हैं।

क्रासिंग प्वाइंट पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी

जलापूर्ति व सीवर लाइनों की स्थिति खतरनाक है। कई जगह दोनों लाइनें एक साथ डली हैं। कई स्थानों पर क्रासिंग प्वाइंट पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। रहवासी बताते हैं कि कई बार नलों से दुर्गंधयुक्त और मटमैला पानी आता है, लेकिन शिकायतों पर सिर्फ लाइन फ्लश कर दी जाती है, स्थायी समाधान नहीं होता।

पानी के चार सैंपलों में मिला बैक्टीरिया

निगम ने मंगलवार को विभिन्न इलाकों से पानी के जो नमूने लिए थे। उनमें से बुधवार को 250 नमूनों का परीक्षण किया गया, जिनमें से चार में बैक्टीरिया मिला है। दो सैंपल आदमपुर खंती के पास, एक बाजपेयी नगर के पास नलकूप और एक खानूगांव में कुएं से लिया गया था।

वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं, काम लगातार चल रहा है

भोपाल में दूषित पानी के मामले को लेकर हम लगातार गंभीरता बरत रहे हैं। वहीं हेल्प लाइन पर आने वाली शिकायतों की सुनवाई मानीटरिंग भी अधिकारियों द्वारा की जा रही है। अमृत 1.0 के काम हमारे कार्यकाल में नहीं हुए। अमृत 2.0 के अलग-अलग पैकेज हैं, जिनमें वाटर और सीवेज के पैकेज हैं। वर्कआर्डर हो चुके हैं। काम चालू हो गया है। – मालती राय, महापौर भोपाल

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