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इंदौर–भोपाल मार्ग पर सात ब्लैक स्पॉट, तीन साल में 65 से अधिक मौतें, आंदोलन की दी चेतावनी

 

अमलाहा। इंदौर-भोपाल फोरलेन मार्ग पर बढ़ते सड़क हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हाईवे पर सात स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां पिछले तीन वर्षों में 65 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

आंकड़ों के अनुसार ग्राम कोठरी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 21 मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद अमलाहा टोल से अमलाहा के बीच 18 लोगों की जान गई। सैकड़ाखेड़ी जोड़ पर 11, लसूडिया परिहार और चचरासी जोड़ पर 5-5, बिलकिसगंज जोड़ पर 3 तथा जताखेड़ा क्षेत्र में 2 लोगों की मौत हुई है।

अमलाहा चौराहा क्षेत्र लगातार सुर्खियों में बना हुआ है

इनमें अमलाहा चौराहा क्षेत्र लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। भोपाल-धामंदा मार्ग पर स्थित यह चौराहा दुर्घटनाओं का केंद्र बन गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और संबंधित टोल कंपनी की लापरवाही के कारण यहां हालात नहीं सुधर रहे।

अपेक्षित सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए

ब्लैक स्पॉट घोषित किए जाने के बावजूद अपेक्षित सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए हैं। रहवासियों और व्यापारियों का कहना है कि चौराहे पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। हाई मास्ट लाइट, रिफ्लेक्टर, फ्लैशिंग सिग्नल और स्पष्ट चेतावनी बोर्डों का अभाव है। रात के समय दृश्यता कम होने से और तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है।

औसतन 10 से 11 लोगों की मौत हो रही है

अचानक कट और असुरक्षित क्रासिंग के चलते कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। क्षेत्र के लोगों का दावा है कि यहां हर साल औसतन 10 से 11 लोगों की मौत हो रही है। न तो स्थायी समाधान दिखाई देता है और न ही प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब किसी स्थान को ब्लैक स्पाट घोषित किया जाता है, तो नियमानुसार त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए, लेकिन अमलाहा चौराहे पर न तो स्थायी समाधान दिखाई देता है और न ही प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन।

टोल वसूली नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त निरीक्षण कर ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की है।

आंदोलन की दी चेतावनी

लोगों का कहना है कि चौराहे पर हाई मास्ट लाइट, सोलर फ्लैशर, रंबल स्ट्रिप्स, स्पीड कैमरे, स्पष्ट रोड मार्किंग, डिवाइडर सुधार और सर्विस रोड जैसी सुविधाएं तत्काल विकसित की जानी चाहिए। साथ ही, ट्रैफिक पुलिस की नियमित तैनाती भी सुनिश्चित हो।

क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र सुधार कार्य शुरू नहीं किए गए तो आंदोलन किया जाएगा। लोगों की मांग है कि हादसों के लिए जिम्मेदारी तय की जाए और समयबद्ध कार्रवाई कर इस मार्ग को सुरक्षित बनाया जाए। अब देखना यह है कि एमपीआरडीसी और टोल कंपनी इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।

 

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