भोपाल/इंदौर: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई और उससे हुई मौतों के मामले में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए गठित संजय कुमार शुक्ल समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
क्यों भंग हुई सरकारी समिति?
दरअसल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया है। चूंकि न्यायिक आयोग के जांच बिंदु और सरकारी समिति के उद्देश्य लगभग एक समान थे, इसलिए शासन ने किसी भी भ्रम से बचने के लिए अपनी समिति को खत्म करने का फैसला लिया।
न्यायिक आयोग के पास होंगे ये अहम जिम्मा:
पूर्व जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता का आयोग अब निम्नलिखित पहलुओं पर जांच करेगा:
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मौतों का असली आंकड़ा: आयोग यह पता लगाएगा कि दूषित पानी के कारण वास्तव में कितनी जानें गईं।
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जवाबदेही तय करना: घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनकी जवाबदेही तय की जाएगी।
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तकनीकी खामियां: जल आपूर्ति तंत्र में प्रशासनिक और तकनीकी कमियों का विश्लेषण किया जाएगा।
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सुझाव: भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस अनुशंसाएं देना।
पुरानी समिति में ये थे शामिल
19 जनवरी को गठित की गई सरकारी समिति में अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल के साथ प्रमुख सचिव पी. नरहरि, आयुक्त संकेत भोंडवे और इंदौर कमिश्नर डॉ. सुदाम खाडे शामिल थे। अब सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी कर इस समिति की कार्यवाही को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
अग्रसर इंडिया अपडेट: इंदौर की जनता अब इस न्यायिक जांच पर टिकी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।




