भोपाल। विधानसभा में गुरुवार को सिंगरौली में अदाणी समूह को आवंटित धिरौली कोयला खदान का मामला उठा। कांग्रेस ने प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। लगभग एक घंटे हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि अदाणी के दबाव में सरकार झुकी और आदिवासियों के हितों को ताक पर रखकर विस्थापन की प्रक्रिया पूरी हुए बिना ही खनन की अनुमति दे दी।
प्रभावित 12 हजार से अधिक हैं, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। जो भिंड के निवासी हैं, उन्हें उपकृत करने के लिए पत्नी के नाम से मुआवजा दे दिया।
संयुक्त समिति बनाकर मामले की जांच कराने की मांग
विपक्ष ने सदन की संयुक्त समिति बनाकर मामले की जांच कराने की मांग की, जिसे लेकर गतिरोध बना रहा। सरकार की ओर से राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि परियोजना के लिए पांच गांवों में निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया, जिसमें 1,552 किसान प्रभावित हुए हैं। 144 करोड़ 68 लाख रुपये मुआवजा दे चुके हैं और बाकी 223 करोड़ 82 लाख रुपये देने की कार्यवाही चल रही है। अपात्र को राशि मिलने की जांच कराएंगे। मंत्रियों के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने आसंदी के सामने नारेबाजी की और फिर बहिर्गमन कर दिया।
अदाणी समूह के कोल ब्लाक का मुद्दा
प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने धिरौली स्थित अदाणी समूह के कोल ब्लाक का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आठ गांव की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जिससे 12,998 परिवार प्रभावित हैं। प्रभावित आदिवासी परिवारों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने का दावा किया जा रहा है, पर जो राशि अवार्ड हुई है उसे देखें तो दो से ढाई लाख रुपये ही मिलेंगे। स्थानीय थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को 15 लाख तथा यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह के नाम पर लगभग 14 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया।
यह सहयोग देने के लिए रिश्वत है क्योंकि दोनों बाहरी हैं। विस्थापन की कार्यवाही पूरी हुए बिना ही खनन का काम शुरू हो गया। कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल विस्थापितों से मिलने गया तो पूरे क्षेत्र को छावनी बना दिया। चार हजार पुलिसकर्मी तैनात कर दिए। छह लाख पेड़ काटे गए। लकड़ी छत्तीसगढ़ भेज दी गई। आखिर सरकार आदिवासियों के साथ है या अदाणी के।
1,552 किसान प्रभावित हुए
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सदन को बताया कि परियोजना में निजी भूमि 554.01 हेक्टेयर, शासकीय गैर वन भूमि 681.80 हेक्टेयर, वन भूमि (संरक्षित वन) 1,335.35 हेक्टेयर और राजस्व वन भूमि 100.84 हेक्टेयर है। निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया, जिसमें 1,552 किसान प्रभावित हुए हैं। 368 करोड़ रुपये का मुआवजा आदेश हुआ। 144 करोड़ 68 लाख रुपये दे दिए और बाकी 223 करोड़ 82 लाख रुपये देने की प्रक्रिया चल रही है। जब तक कार्यवाही चल रही है, इनको राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज भी मिलेगा। भूखंड के 2.50 लाख, मकान के बदले छह लाख, नौकरी के बदले एकमुश्त छह लाख, पुनर्वास अनुमान राशि 75 हजार, मकान बनाने के लिए तीन लाख रुपये 111 विस्थापितों को दिए जा चुके हैं। बाहरी व्यक्ति को लाभ मिलने के मामले में जांच करा ली जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कहा कि सरकार ने जिम्मेदारी से जांच कराने की बात कही है, लेकिन कांग्रेस के विधायक संयुक्त समिति बनाकर जांच के लिए अड़े रहे।
मैं भी आदिवासी हूं, अन्याय नहीं होने देंगे
सिंगरौली की प्रभारी मंत्री संपतिया उइके ने बताया कि 33 हजार के लगभग पेड़ कटे हैं। पेड़ कटने के बाद मिट्टी अलग की जा रही है। अभी कोयला नहीं निकाला जा रहा है। प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि सभी को जब मुआवजा मिल जाए, तब ही कोयला निकाला जाए। मैं भी आदिवासी हूं, अन्याय नहीं होने देंगे।




