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‘कचरे से कंचन’ बनाने की राह पर भोपाल के बड़े आवासीय परिसर, एक दर्जन कॉलोनियां कचरे से बना रहीं खाद

अग्रसर इंडिया: विशेष रिपोर्ट

भोपाल की 50 बड़ी कॉलोनियों को अब खुद निपटाना होगा अपना कचरा: 1 अप्रैल से लागू हो रहे ‘ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026’

भोपाल: राजधानी को स्वच्छ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026’ के तहत अब शहर के बड़े आवासीय परिसरों, सरकारी दफ्तरों और विश्वविद्यालयों को अपने गीले कचरे का निपटान खुद करना होगा। एक अप्रैल से लागू होने वाले इन नियमों से भोपाल की करीब 50 से अधिक बड़ी कॉलोनियां और संस्थान सीधे प्रभावित होंगे।

कौन आएगा इस दायरे में? (नियमों की शर्तें)

नए नियमों के अनुसार, ‘थोक अपशिष्ट उत्पादक’ की श्रेणी में उन संस्थानों को रखा गया है जो:

  • 100 किलो कचरा: रोजाना पैदा करते हैं।

  • 20,000 वर्ग मीटर: या उससे अधिक का फर्श क्षेत्रफल (Floor Area) रखते हैं।

  • 40,000 लीटर: से अधिक पानी का दैनिक उपयोग करते हैं।

आत्मनिर्भर कॉलोनियां: जो पहले से बन रहीं मिसाल

नगर निगम के अनुसार, भोपाल की लगभग एक दर्जन कॉलोनियां पहले से ही कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर हैं। इनमें आकृति इको सिटी, लेक पर्ल गार्डन, सुविधा विहार, ग्रीन सिटी, सागर सिल्वर स्प्रिंग, सम्राट पार्क, फार्च्यून सिग्नेचर और पेसिफिक ब्लू शामिल हैं। ये कॉलोनियां खुद कचरा प्रोसेसिंग यूनिट चलाकर खाद बना रही हैं।

डिजिटल ऑडिट से होगी निगरानी

अब कागजी रिपोर्टिंग नहीं, बल्कि सेंट्रल ऑनलाइन पोर्टल के जरिए कचरे की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग होगी। संस्थानों को परिसर के अंदर ही गीले कचरे का प्रसंस्करण करना अनिवार्य होगा। यदि जगह की कमी है, तो उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत ‘जिम्मेदारी प्रमाणपत्र’ लेना होगा।

निगम की सुस्ती बढ़ा सकती है परेशानी

नियम लागू होने में एक महीने से भी कम समय बचा है, लेकिन नगर निगम ने अब तक सभी पात्र संस्थानों को चिन्हित करने और नोटिस देने की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। सीपीसीबी की रिपोर्ट कहती है कि थोक उत्पादक कुल कचरे का 30% हिस्सा पैदा करते हैं, ऐसे में निगम की देरी शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर भारी पड़ सकती है।

अधिकारी का पक्ष: “शहर को स्वच्छ रखना सभी का साझा दायित्व है। करीब एक दर्जन कॉलोनियां पहले से कचरा निष्पादन कर रही हैं, बाकी संस्थानों को जल्द चिन्हित कर नोटिस जारी किए जाएंगे।” — संस्कृति जैन, निगमायुक्त, भोपाल

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