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खेतों में सीवेज का पानी बहाने पर NGT सख्त, कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा, मामला भोपाल बेंच को भेजा

 

NGT Bhopal : कोलार क्षेत्र में स्थित एक निजी डेंटल और आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज द्वारा खेतों में सीवेज का पानी छोड़ने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NG …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 10 Feb 2026 08:59:31 AM (IST)Updated Date: Tue, 10 Feb 2026 08:59:31 AM (IST)

खेतों में सीवेज का पानी बहाने पर NGT सख्त, कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा, मामला भोपाल बेंच को भेजा

खेतों में सीवेज का पानी बहाने पर NGT सख्त

HighLights

  1. मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई के लिए स्वीकार
  2. सीवेज पानी से 130 एकड़ भूमि की सिंचाई की जा रही
  3. सुनवाई अब 12 मार्च को भोपाल बेंच में होगी

भोपाल। कोलार क्षेत्र में स्थित एक निजी डेंटल और आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज द्वारा खेतों में सीवेज का पानी छोड़ने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में हिनोतिया आलम निवासी रामलाल मीणा ने याचिका लगाई थी। उन्होंने याचिका में बताया कि इस दूषित पानी के कारण क्षेत्र की 20 प्रतिशत आबादी पर कैंसर और अन्य जानलेवा बीमारियों का संकट मंडरा रहा है।

एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे सुनवाई के लिए स्वीकार किया है और मामला भोपाल से जुड़ा होने के चलते इसे सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल को स्थानांतरित कर दिया है।

दूषित सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के खेतों में बहाया जा रहा

कोलार रोड स्थित ग्राम हिनोतिया आलम निवासी रामलाल मीणा ने एनजीटी में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि पास में ही बने एक निजी डेंटल और आयुर्वेदिक कॉलेज से निकलने वाला भारी मात्रा में दूषित सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे खुले खेतों में बहाया जा रहा है।

 

यह गंदा पानी खेतों से होता हुआ मिलन कॉलोनी, फॉर्च्यून स्टेट कॉलोनी और कोलार के इस्कॉन मंदिर तक पहुंच रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इसी सीवेज के पानी से लगभग 130 एकड़ भूमि की सिंचाई की जा रही है, जिससे पैदा होने वाली सब्जियां, गेहूं और चावल भोपाल की 20 प्रतिशत आबादी तक पहुंच रहे हैं।

कैंसर और संक्रमण का बढ़ता खतरा

शिकायत में कहा है कि इस दूषित पानी के कारण आसपास की कालोनियों के बोरवेल पूरी तरह प्रदूषित हो चुके हैं। पानी से भयंकर दुर्गंध आ रही है और लोग कैंसर, हैजा, टाइफाइड, मलेरिया, किडनी-लिवर की बीमारियों और त्वचा रोगों का शिकार हो रहे हैं।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि कॉलेज में रहने वाले लगभग 700 छात्र-छात्राओं और स्टॉफ का मलमूत्र सीधे खेतों में बहाया जा रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

सुनवाई अब 12 मार्च को भोपाल बेंच में होगी

मामले की अगली सुनवाई अब 12 मार्च को भोपाल बेंच में होगी। याचिका में कालेज पर भारी जुर्माना लगाने के साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की उचित व्यवस्था न होने तक कालेज के संचालन पर तत्काल रोक लगाने और अवैध रूप से बनाई गई उस नाली को भी बंद करने की मांग की है।

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