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मध्य प्रदेश में हर 10 में से एक मौत की वजह कैंसर, युवा पीढ़ी तेजी से आ रही चपेट में

भोपाल। मध्य प्रदेश में भी कैंसर खामोश महामारी की तरह पैर पसार रहा है। इसकी चपेट में अब युवा पीढ़ी तेजी से आ रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और नेशनल सेंटर फॉर डिसीस इन्फार्मेटिक्स एंड रिसर्च (एनसीडीआइआर) की ताजा रिपोर्ट ‘प्रोफाइल आफ कैंसर’ के साथ-साथ एम्स भोपाल के सर्जिकल आंकोलाजी विभाग के शोध ने प्रदेश में कैंसर की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मध्य प्रदेश में वर्तमान में 50.5 प्रतिशत बीमारियों का बोझ अब गैर-संचारी रोगों का है, जिसमें कैंसर की हिस्सेदारी सबसे घातक साबित हो रही है। वहीं, एम्स भोपाल के सर्जिकल आंकोलाजी विभाग द्वारा हाल ही में किए गए एक शोध ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं।

इसके अनुसार, अस्पताल पहुंचने वाली लगभग 60 प्रतिशत महिलाओं में कैंसर की पहचान तीसरे और चौथे (एडवांस) स्टेज में हो रही है। शोधकर्ताओं ने पिछले छह महीनों में 167 रोगियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि महज 32 प्रतिशत मामलों में ही दूसरी स्टेज तक बीमारी पकड़ी जा सकी।

जागरूकता का अभाव और सामाजिक संकोच सबसे बड़ी बाधा

परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. विनय कुमार (विभागाध्यक्ष, सर्जिकल आंकोलाजी, एम्स भोपाल) के अनुसार जागरूकता का अभाव और सामाजिक संकोच सबसे बड़ी बाधा है। महिलाएं शुरुआती गांठों को गंभीरता से नहीं लेतीं। कैंसर का नाम सुनते ही बदनामी का भय और दर्द न होने के कारण डॉक्टर के पास न जाना, मृत्यु दर को बढ़ा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पहली स्टेज पर पहचान हो जाए, तो जीवन रक्षा की दर 90 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। इस अध्ययन में डॉ. अभिषेक धर द्विवेदी, डॉ. प्राची कर्णे, धर्मेंद्र मेहरा और अनुरुद्ध मिश्रा ने भूमिका निभाई है।

युवाओं में ‘गुटखा’ बना स्टाइल स्टेटमेंट

गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) स्थित कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि भोपाल सहित पूरे प्रदेश में ओरल (मुंह), ब्रेस्ट और बड़ी आंतों का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। युवाओं में स्मोकिंग की तुलना में तंबाकू चबाने की प्रवृत्ति अधिक है।

युवा उन स्टार सेलिब्रिटीज को फालो कर रहे हैं जो तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन करते हैं। वे इसे स्टाइल स्टेटमेंट समझ रहे हैं। डॉ. श्रीवास्तव ने चेतावनी दी कि देर रात तक जागने, फिजिकल एक्टिविटी कम होने और खेल मैदान सिमटने से नई पीढ़ी इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील हो गई है।

वर्ष 2025 तक की डरावनी तस्वीर

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में प्रदेश में पुरुषों में कैंसर के 38,171 मामले थे, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 43,097 हो गए हैं। वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 39,717 से बढ़कर 45,200 तक पहुंच गया है।

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