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मध्य प्रदेश विधानसभा में सिंगरौली कोल ब्लॉक परियोजना पर हंगामा, मुआवजे और विस्थापन पर विपक्ष ने उठाया सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में आज सिंगरौली की धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना को लेकर जबरदस्त घमासान देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर भू-अर्जन नियमों की अनदेखी और आदिवासियों के हक मारने का गंभीर आरोप लगाया। हंगामे और नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा, जिसके बाद असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।


विपक्ष का आरोप: “मुआवजा कम, पुलिस का पहरा ज्यादा”

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सदन में मोर्चा संभालते हुए कहा कि धिरौली कोल ब्लॉक में विस्थापन की प्रक्रिया पूरी किए बिना ही खदान संचालन की अनुमति दे दी गई है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कुछ प्रमुख बिंदु उठाए:

  • नियमों की धज्जियां: सिंघार ने आरोप लगाया कि भू-अर्जन अधिनियम का पालन नहीं हुआ और प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूरी राशि नहीं मिली।

  • अपनों को रेवड़ियां: विपक्ष ने दावा किया कि थाना प्रभारी और यातायात प्रभारी की पत्नियों को मुआवजा दिया गया, जबकि वे वहां की स्थानीय निवासी भी नहीं हैं।

  • मुआवजे में खेल: सिंघार के मुताबिक, 6000 करोड़ रुपये के कुल मुआवजे की जगह मात्र 354 करोड़ रुपये ही जमा कराए गए हैं। इस हिसाब से किसी भी प्रभावित को 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं मिलेंगे।

  • पुलिस का खौफ: नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “जब हम वहां गए तो 4000 पुलिस वाले तैनात थे। सरकार आखिर क्या छिपाना चाहती है जो हमें विस्थापितों से मिलने नहीं दिया गया?”


सरकार का पक्ष: “अभी खदान शुरू नहीं हुई, सिर्फ मिट्टी हट रही है”

सरकार की ओर से मंत्रियों ने मोर्चा संभालते हुए विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया।

  • मंत्री संपतिया उइके ने कहा कि वे खुद आदिवासी हैं और किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी खदान का काम शुरू नहीं हुआ है, केवल पेड़ों की कटाई और मिट्टी हटाने का काम चल रहा है।

  • राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने जानकारी दी कि 5 गांवों में अधिग्रहण की कार्रवाई हो चुकी है। 1152 विस्थापितों के लिए 368 करोड़ का मुआवजा तय हुआ है, जिसमें से 144 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।

  • प्रहलाद सिंह पटेल ने आश्वासन दिया कि विभागीय मंत्री जांच के लिए तैयार हैं और पात्रता की दोबारा जांच कर ली जाएगी।


हंगामे की भेंट चढ़ी कार्यवाही

कांग्रेस विधायक दल “आदिवासी विरोधी सरकार” के नारे लगाते हुए गर्भगृह (आसंदी के सामने) पहुंच गया। भारी शोर-शराबे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को पहले 10 मिनट और फिर 12 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

अंत में क्या हुआ? विपक्ष ने इस पूरे मामले की जांच के लिए विधानसभा की संयुक्त कमेटी बनाने की मांग की। सरकार द्वारा ठोस आश्वासन न मिलने पर कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

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