भोपाल। जीवनदायिनी नर्मदा का पानी मंडलेश्वर में श्रद्धालुओं के लिए आचमन और स्नान का माध्यम है, लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है। यहां नदी का पानी आचमन के लायक भी नहीं है। मंडलेश्वर स्थित नर्मदा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की 2025 की जनवरी से मई तक की जांच रिपोर्ट में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। इसकी मात्रा 325 से 729 MPN (Most Probable Number) प्रति 100 मिलीलीटर तक पाई गई।
गौरतलब है कि 50 MPN से कम मात्रा वाला पानी पीने योग्य माना जाता है। 50 से 500 MPN तक का पानी B ग्रेड का होता है, जो पीने लायक नहीं होता। यहां की मात्रा इससे कहीं ज्यादा है, जो सीधे सीवरेज और मल-मूत्र से दूषित होने का संकेत देती है। हजारों श्रद्धालु नर्मदा में स्नान करते हैं और आचमन करते हैं, लेकिन यह पानी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
विधानसभा में भागीरथपुरा दूषित पानी मामले पर पूछे गए सवालों के जवाब में यह जानकारी सामने आई। मंडलेश्वर में ड्रेनेज का गंदा पानी सीधे नर्मदा में मिल रहा है, जिससे पवित्र नदी दूषित हो रही है। इंदौर शहर को इसी नर्मदा के पानी की सप्लाई होती है, जहां ट्रीटमेंट प्लांट फिल्टरेशन के बाद बैक्टीरिया नष्ट कर पानी भेजता है। लेकिन जांच रिपोर्ट से साफ है कि कच्चा पानी गंभीर रूप से प्रदूषित है।
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का दावा अलग है। क्षेत्रीय अधिकारी सतीश कुमार चौकसे ने कहा- हमारे विभाग द्वारा हर माह मंडलेश्वर सहित नर्मदा के अलग-अलग हिस्सों के पानी की जांच की जाती है। जांच में पानी A और B श्रेणी का पाया गया है। इस पानी को प्राथमिक उपचार के बाद पिया जा सकता है। हमारी जांच में ई-कोलाई की मात्रा तय मानक से कम पाई है। ओंकारेश्वर में नालों से आने वाले दूषित पानी के उपचार के लिए चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं। मंडलेश्वर में एक STP निर्माणाधीन है। इसके बनने के बाद यहां भी नालों का पानी उपचारित होकर नदी में जाएगा।
वहीं भूतपूर्व राष्ट्रीय नोडल अधिकारी (पेयजल सुरक्षा, भारत सरकार) सुधींद्र मोहन शर्मा ने कहा- मंडलेश्वर में जिस हिस्से में ई-कोलाई की मात्रा 300 से अधिक पाई गई है, वह पानी सीवरेज से दूषित है और पीने व आचमन के योग्य नहीं है। अच्छी बात है कि ट्रीटमेंट प्लांट में पानी की जांच पहले हो रही है, जिससे क्लोरीन की सही मात्रा तय हो रही है। ट्रीटमेंट के बाद इंदौर को भेजा जाने वाला पानी सुरक्षित है। STP बनने के बाद भी उपचारित पानी का आउटफाल घाट के डाउनस्ट्रीम में होना चाहिए, ताकि घाट की पवित्रता बनी रहे।
इंदौर में भी हालात खराब: नगर निगम की लैब में दो माह में 280 सैंपलों में से 206 फेल
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद भी शहर में नर्मदा पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल बने हुए हैं। नगर निगम की मूसाखेड़ी लैब में दिसंबर-जनवरी के 50 दिनों में 280 सैंपलों में से 206 फेल हुए। जनवरी में 20 दिनों में ही 167 सैंपल फेल हुए। पिछले दो वर्षों में दूषित पानी की शिकायतें और फेल सैंपल बढ़े हैं।
यह खुलासा भी विधानसभा में हुआ। इंदौर को मंडलेश्वर से आने वाला पानी ट्रीटमेंट के बाद मिलता है, लेकिन कच्चे पानी की स्थिति चिंताजनक है। विशेषज्ञों का कहना है कि नदी में सीधे सीवेज मिलने से बैक्टीरिया का खतरा बढ़ रहा है। सरकार को तत्काल STP पूरा करने और नालों को नदी में गिरने से रोकने के कड़े कदम उठाने होंगे।
श्रद्धालुओं और इंदौरवासियों के लिए यह बड़ा अलर्ट है। नर्मदा को प्रदूषण मुक्त रखना अब समय की मांग है, वरना पवित्र नदी का पानी भी जहर बन सकता है। विभाग लगातार जांच कर रहा है, लेकिन हकीकत से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।




