भोपाल, 01 फरवरी। आगामी चुनावों की तैयारियों के तहत भोपाल जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा चलाए जा रहे विशेष सारांश पुनरीक्षण (स्पेशल सारांश रिविजन) के दौरान नई मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए रविवार शाम तक 81,614 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिमुक्त बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कई अहम प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं।
आवेदनों का ब्योरा और कार्यवाही की स्थिति
जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब तक प्राप्त आवेदनों में से सभी 81,614 नए नाम जोड़ने के आवेदनों की प्रारंभिक जाँच कर ली गई है और आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी कर ली गई हैं। इसके अतिरिक्त, पहले से सूचीबद्ध मतदाताओं के नाम, पते या अन्य विवरणों में संशोधन के लिए 48,324 आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं, विभिन्न कारणों से नाम कटवाने (डिलीशन) के लिए 10,439 आवेदन दर्ज किए गए हैं।
‘नो-मैपिंग’ मतदाताओं की शीघ्र सुनवाई
मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया में एक बड़ी चुनौती ‘नो-मैपिंग’ वाले मतदाताओं (वे मतदाता जिनका पता मतदाता सूची में दर्ज बूथ क्षेत्र के साथ मेल नहीं खाता) की जाँच है। जिले में कुल 1,16,925 नो-मैपिंग मामले सामने आए थे, जिनमें से 73,254 मामलों की सुनवाई पहले ही पूरी की जा चुकी है। शेष 43,671 मामलों की सुनवाई और दस्तावेज़ों की जाँच का लक्ष्य अगले 13 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
प्रशासन ने बढ़ाई कार्यक्षमता, एईआरओ की संख्या दोगुनी
कार्यभार को तेज़ी से निपटाने और प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक तंत्र को मज़बूत किया गया है। इस कड़ी में, नामांकन और अन्य संशोधन प्रक्रियाओं की देखरेख करने वाले असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (एईआरओ) की संख्या को 90 से बढ़ाकर 181 कर दी गई है। यह कदम नागरिकों को त्वरित सेवा और शेष कार्यों के समयबद्ध निष्पादन को सुनिश्चित करेगा।
विशेषज्ञों की राय: ‘स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सटीक मतदाता सूची ज़रूरी’
इस व्यापक अभ्यास पर नगर के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए।
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श्री राजेश कुमार मिश्रा, पूर्व जिला निर्वाचन अधिकारी, भोपाल: “मतदाता सूची की शुद्धता और समय पर अद्यतनकरण किसी भी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की रीढ़ होती है। 80 हज़ार से अधिक नए आवेदन नागरिकों में बढ़ती जागरूकता का संकेत हैं। एईआरओ की संख्या बढ़ाना एक समयबद्ध कदम है, जो बड़ी संख्या में आवेदनों और नो-मैपिंग मामलों के निपटारे में कार्यदबाव को कम करेगा।”
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डॉ. प्रीति सिंह, समाजशास्त्री एवं शासन विशेषज्ञ: “यह आँकड़े दर्शाते हैं कि एक बड़ा तबका, विशेषकर नए युवा मतदाता और जिनके विवरण में बदलाव हुआ है, औपचारिक प्रक्रिया से जुड़ रहा है। ‘नो-मैपिंग’ के मामलों का तेज़ी से निस्तारण महत्वपूर्ण है ताकि कोई भी योग्य नागरिक मतदान के अपने अधिकार से वंचित न रह जाए। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक भागीदारी को मज़बूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।”
निष्कर्ष:
भोपाल जिला प्रशासन द्वारा मतदाता सूची सुधार अभियान को गति देना चुनावी तैयारियों में गंभीरता को दर्शाता है। बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होना नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का सकारात्मक संकेत है। अब चुनौती इन सभी आवेदनों और शेष नो-मैपिंग मामलों की पारदर्शी और त्रुटिरहित जाँच करते हुए, एक विश्वसनीय और अद्यतन मतदाता सूची का अंतिम रूप शीघ्रता से तैयार करना है।




