Bhopal Breaking news Latest News MP Polictics

MP के आयुर्वेद कॉलेजों पर NCISM की सख्ती, अब दिल्ली से होगी ऑनलाइन निगरानी, डेटा में हेरफेर की तो छिनेगी मान्यता

भोपाल। प्रदेश के आयुर्वेद कॉलेजों में व्याप्त अव्यवस्थाओं और कथित धांधलियों पर अब नेशनल कमीशन फार इंडियन सिस्टम आफ मेडिसिन (एनसीआइएसएम) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

नई व्यवस्था के तहत अब मध्य प्रदेश के किसी भी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में यदि कोई स्टाफ उपस्थिति दर्ज कराता है, तो उसकी जानकारी सीधे दिल्ली स्थित आयोग के मुख्यालय में दिखाई देगी।

बार-बार चेतावनी के बाद भी सुधार न होने पर आयोग अब आनलाइन निगरानी के साथ-साथ औचक निरीक्षण की तैयारी में है। इस सख्ती से सत्र 2026-27 की मान्यता पर तलवार लटक गई है। आयोग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि प्रदेश के कई निजी और सरकारी कॉलेज मरीजों के ओपीडी और आइपीडी डेटा के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ कर रहे हैं, ताकि कागजों पर अस्पताल को सक्रिय दिखाया जा सके।

इसके अलावा शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ की उपस्थिति भी निराशाजनक मिली है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों के शोध कार्यों और मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है।

राजधानी के पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान ने इस दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। यहां शासन के निर्देशों का पालन करते हुए फिलहाल शिक्षकों को उपस्थित को आनलाइन जोड़ा गया है। बाकी स्टाफ को जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है।

सुधार नहीं हुआ तो बंद होंगे कॉलेज

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय के अनुसार कालेजों में संसाधनों को सुधारना अब अनिवार्य है। जो कॉलेज केवल कागजों पर चल रहे हैं, उन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा।

डेटा में हेराफेरी और शिक्षकों की अनुपस्थिति ने आयुर्वेद शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। निर्धारित समय सीमा में सुधार नहीं होने पर कई संस्थानों की मान्यता रद की जा सकती है।

अब दिल्ली से ऑनलाइन और भोपाल से ऑफलाइन दोनों तरीकों से होगा औचक निरीक्षण।- अस्पताल को सक्रिय दिखाने के लिए मरीजों के आंकड़ों में हेराफेरी करने वाले संस्थानों की सूची तैयार।

स्टाफ की कमी और फर्जी डेटा के कारण मेडिकल छात्रों का अनुसंधान कार्य ठप पड़ा है।- लापरवाही बरतने वाले संस्थानों को सत्र 2026-27 के लिए अपात्र घोषित किया जा सकता है।

शासन के निर्देशानुसार हमारे संस्थान में टीचिंग स्टाफ (शैक्षणिक स्टाफ) की उपस्थिति को आनलाइन प्रणाली से जोड़ दिया गया है। इसके माध्यम से पारदर्शिता बढ़ेगी। वर्तमान में बाकी नॉन-टेक्निकल (गैर-तकनीकी) स्टाफ को भी इस आनलाइन सिस्टम से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। – डॉ. उमेश शुक्ला, डीन, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज एवं अस्पताल, भोपाल

Please follow and like us:
Pin Share

Leave a Reply