भोपाल। राज्य साइबर फोरेंसिक लैब की जांच रिपोर्ट अब सीधा थाने और कोर्ट में ऑनलाइन पहुंचेगी। इसके लिए डीजीपी कैलाश मकवाणा ने शुक्रवार को ई-फोरेंसिक 2.0 का शुभारंभ किया। अभी हाथों-हाथ रिपोर्ट पहुंचाने में देरी हो रही थी।
साथ ही गोपनीयता की दृष्टि से यह व्यवस्था की गई है कि साइबर फोरेंसिक के जिलों से हाथों-हाथ भेजे जाने वाले सैंपल में क्यूआर कोड लगाया जाएगा। इससे लाने वाले को यह पता नहीं चलेगा सैंपल किस चीज का है।
सीसीटीएनएस से एकीकरण की प्रक्रिया
राज्य साइबर मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि साइबर फोरेंसिक लैब को क्राइम एंड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (सीसीटीएनएस) से एकीकृत करने की प्रक्रिया चल रही है।
आगामी माह में यह एकीकरण पूरा होने के बाद प्रदेश के पुलिस थाने सीधे सीसीटीएनएस के माध्यम से ई-फोरेंसिक पोर्टल पर केस से संबंधित परीक्षण एवं साक्ष्य विश्लेषण के लिए ऑनलाइन अनुरोध भेज सकेंगे।
पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर
इस व्यवस्था से डिजिटल ई-साइन, रियल-टाइम केस ट्रैकिंग, स्वचालित एसएमएस एवं ई-मेल अलर्ट तथा आंशिक रिपोर्टिंग जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे फोरेंसिक परीक्षण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और दक्ष बन सकेगी। न्यायिक प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।
राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और डेटा एकीकरण
साथ ही केंद्रीय डैशबोर्ड के माध्यम से राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो एवं गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर फोरेंसिक सेवाओं के प्रदर्शन की निगरानी भी की जा सकेगी। इसे इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आइसीजेएस) से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे पुलिस, न्यायालय, अभियोजन और फोरेंसिक का डाटा एकीकृत किया जा सकेगा।




