भोपाल: मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार अब अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियों और 2028 के चुनावी समीकरणों के बीच सामंजस्य बैठाने जा रही है। खबर है कि चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल 2026) की शुरुआत के साथ ही निगम-मंडलों और विभिन्न आयोगों में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों की ‘जंबो लिस्ट’ जारी हो सकती है। इसमें उन दिग्गजों को जगह मिलने की उम्मीद है, जिन्हें कैबिनेट विस्तार में शामिल नहीं किया जा सका।
प्रमुख बिंदु (HighLights):
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वरिष्ठों को सम्मान: गोपाल भार्गव, अजय विश्नोई और अर्चना चिटनीस जैसे दिग्गजों को निगम-मंडलों में बड़ी जिम्मेदारी संभव।
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कांग्रेस से आए नेताओं का ख्याल: दल-बदल कर भाजपा में आए विधायकों (जैसे अमरवाड़ा के कमलेश शाह) को भी ‘एडजस्ट’ किया जा सकता है।
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क्षेत्रीय समीकरण: मालवा से लेकर महाकौशल तक के जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश।
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पेंडिंग आयोग: महिला आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को लंबे समय बाद मिल सकते हैं अध्यक्ष।
कैबिनेट विस्तार या निगम-मंडल?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में फिलहाल सीमित सीटें खाली हैं, जबकि दावेदारों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व ने ‘मध्य मार्ग’ निकालते हुए वरिष्ठ विधायकों को कैबिनेट स्तर का दर्जा देकर निगम-मंडलों का अध्यक्ष बनाने की रणनीति बनाई है।
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फायदा: इससे पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष को रोका जा सकेगा और अनुभवी नेताओं की ऊर्जा का उपयोग सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में किया जाएगा।
इन महत्वपूर्ण आयोगों में खत्म होगा ‘इंतजार’
पिछले काफी समय से कई संवैधानिक और स्वायत्त निकायों में अध्यक्ष के पद रिक्त होने से हजारों मामले लंबित हैं।
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राज्य महिला आयोग: पिछली नियुक्तियों के कानूनी विवादों के बाद अब नई शुरुआत की तैयारी है।
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SC/ST और अल्पसंख्यक आयोग: इन आयोगों में अध्यक्ष की नियुक्ति से सरकार अपनी सामाजिक न्याय की छवि को मजबूत करना चाहती है।
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पिछड़ा वर्ग आयोग: मार्च 2026 की ताजा अपडेट के अनुसार, साल्वी निरंजन ज्योति जैसे नामों को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने के बाद अब राज्य स्तर पर भी नियुक्तियां तेज होंगी।
[अपराध समाचार]: जबलपुर में युवती के अपहरण और सौदेबाजी का सनसनीखेज मामला
जबलपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ नौकरी की तलाश में निकली एक युवती का अपहरण कर लिया गया। अपराधियों ने मानवता की सारी हदें पार करते हुए उसे राजस्थान ले जाकर एक व्यक्ति को ‘पत्नी’ बनाकर बेच दिया। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए राजस्थान के आरोपी को गिरफ्तार किया है और युवती को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह मामला क्षेत्र में बढ़ते मानव तस्करी के नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
निष्कर्ष: 2028 के लिए ‘मोर्चाबंदी’
मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष के बीच हुए मंथन का संदेश साफ है—पार्टी अब पुराने अनुभव और नए खून के बीच एक पुल बनाना चाहती है। नियुक्तियों की यह सूची केवल पदों का बंटवारा नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की ‘बिसात’ होगी।




