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MP में तीन वर्ष तक हर साल 7,500 आरक्षक पदों पर होगी भर्ती, CM मोहन यादव ने की घोषणा

 

मध्य प्रदेश में पुलिस आरक्षकों के 25 हजार पद खाली हैं। सरकार हर साल 7,500 भर्ती की योजना बना रही है, लेकिन प्रशिक्षण क्षमता, सेवानिवृत्ति और चयन प्रक् …और पढ़ें

MP में तीन वर्ष तक हर साल 7,500 आरक्षक पदों पर होगी भर्ती, CM मोहन यादव ने की घोषणा

प्रदेश में पुलिस आरक्षकों की भर्ती। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. प्रदेश में 25 हजार पुलिस पद लंबे समय से खाली।
  2. हर साल 7,500 भर्ती, लेकिन वास्तविक वृद्धि कम।
  3. प्रशिक्षण क्षमता सीमित, एक समय में 7,500 प्रशिक्षु संभव।

 भोपाल। प्रदेश में पुलिस आरक्षकों के 25 हजार पद खाली पड़े हैं। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने घोषणा की है कि तीन वर्ष तक हर साल 7,500 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिससे रिक्त पदों की पूर्ति की जा सके। इनमें पहला बैच इसी वर्ष अप्रैल-मई तक मिल जाएगा। सच्चाई यह है कि रिक्त पदों को भरने में कम से कम पांच वर्ष लग जाएंगे। कारण, भर्ती के बाद भी पुलिस बल की संख्या प्रति वर्ष तीन से चार हजार ही बढ़ पा रही है।

इसका कारण यह कि ओबीसी आरक्षण के चलते 13 प्रतिशत पद होल्ड किए जाने के बाद 6,525 पदों के विरुद्ध ही अंतिम परीक्षा परिणाम जारी किया जाएगा। इसमें लगभग एक हजार ऐसे होते हैं जो दूसरे राज्यों में या केंद्र में अच्छी नौकरी मिलने पर ज्वाइन नहीं करते हैं। उधर, 62 वर्ष की सेवा पूरी कर लगभग डेढ़ हजार पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में हर साल लगभग चार हजार बल ही बढ़ रहा है। उधर, जनसंख्या और अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

 

बता दें, प्रदेश में पुलिस का स्वीकृत बल एक लाख 26 हजार है। नया थाना खुलने पर ही बल बढ़ता है। यह है बड़ी चुनौती रिक्त पदों को भरने में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में एक समय में 7500 से अधिक पुलिस आरक्षकों को प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता। आरक्षकों का बुनियादी प्रशिक्षण नौ माह चलता है। यानी, प्रति वर्ष लगभग 7500 आरक्षकों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इससे अधिक आरक्षकों की भर्ती के पहले प्रशिक्षण केंद्रों की क्षमता बढ़ानी होगी। जबलपुर में पुलिस प्रशिक्षण स्कूल खोलने का प्रस्ताव है।

दूसरे राज्यों से भी नहीं लिया सबक

  • अन्य राज्यों से तुलना करें तो मध्य प्रदेश गंभीर अपराधों की सर्वाधिक संख्या के मामले में पहले से पांचवें नंबर के बीच में है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के विरुद्ध सबसे अधिक अपराध (22,323 मामले) मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए।
  • महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामले में राज्य देश में पांचवें नंबर पर है। साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2025 में 600 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी हो गई। साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतें पांच लाख से ऊपर रहीं। इसके बाद भी स्थिति यह है कि प्रदेश भर में साइबर का कुल पुलिस बल 300 भी नहीं है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2023 में एक झटके में 60 हजार पुलिस आरक्षकों की भर्ती की। 32 हजार पुलिस आरक्षकों की भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है। मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष अपराध पांच लाख के करीब होने के बाद भी एक लाख पुलिसकर्मी ही हैं। इनमें भी लगभग 10 प्रतिशत अवकाश पर रहते हैं।

पुलिस बल की कमी से यह नुकसान

पुलिसकर्मियों की कमी के कारण, अपराधों की विवेचना और गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं कोर्ट में चालान प्रस्तुत करने में देरी हो रही है। लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत पंजीबद्ध होने के बाद अपराध दर्ज होने में डेढ़ से दो साल लग रहे हैं। इसी तरह अपराध पंजीबद्ध होने के बाद अभियोजन में भी अधिकतर मामलों में औसतन दो वर्ष लग रहे हैं।

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