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MP News: मध्य प्रदेश में जर्जर पुलों की जांच वाली 1.75 करोड़ की जर्मन मशीन ‘कबाड़’ में नीलाम, PWD का अजीब फैसला

भोपाल: मध्य प्रदेश में जर्जर हो चुके सैकड़ों पुलों की सुरक्षा अब भगवान भरोसे है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने पुलों की आंतरिक जांच करने वाली प्रदेश की इकलौती ‘ब्रिज अंडर स्लंग इंस्पेक्शन यूनिट’ (MBIU) को कबाड़ घोषित कर नीलाम कर दिया है। पौने दो करोड़ की यह जर्मन मशीन बिना तोड़-फोड़ के पुलों की सेहत का पता लगाने में सक्षम थी।

प्रमुख बिंदु (HighLights):

  • तकनीकी संकट: प्रदेश के 253 जर्जर पुलों के बीच जांच की इकलौती मशीन खत्म।

  • बड़ी बर्बादी: 1.75 करोड़ की जर्मन मशीन पिछले चार साल से धूल खा रही थी।

  • ट्रैक रिकॉर्ड: इसी मशीन से प्रदेश के 200 से अधिक महत्वपूर्ण पुलों का तकनीकी ऑडिट हुआ था।

  • नीलामी: PWD ने मशीन को कबाड़ बताकर मुंबई की एक कंपनी को बेच दिया है।

क्यों खास थी यह ‘जर्मन मशीन’?

करीब 16 साल पहले भारत सरकार ने जर्मनी की ‘मूग’ कंपनी से तीन खास मशीनें खरीदी थीं, जिनमें से एक मध्य प्रदेश को मिली थी। इस मशीन की खासियत नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT) थी। यानी बिना पुल को नुकसान पहुँचाए, यह मशीन उसके अंदरूनी हिस्से, सरियों की जंग और कंक्रीट की मजबूती की सटीक जांच कर लेती थी।

चार साल तक PWD की लापरवाही का शिकार रही यूनिट

यह मशीन पिछले चार वर्षों से विभाग के ईएंडएम (इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल) विंग में निष्क्रिय पड़ी थी। इसके हाइड्रोलिक पुर्जे खराब थे, लेकिन विभाग ने इन्हें ठीक कराने के बजाय मशीन को कबाड़ में डालना बेहतर समझा। साल 2018 में नर्मदापुरम के सुखतवा पुल की आखिरी जांच इसी मशीन से हुई थी, जिसके बाद 2022 से यह पूरी तरह बंद हो गई।

MP के 253 पुलों पर मंडरा रहा है खतरा

प्रदेश में वर्तमान में पुलों की स्थिति चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार: | श्रेणी | संख्या | | :— | :— | | कुल जर्जर पुल | 253 | | अति खतरनाक पुल | 46 | | हालत | सरिये में जंग, कंक्रीट का झड़ना |

इन 46 “ब्लैक स्पॉट” पुलों पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जानकारों का कहना है कि जहां ऐसी आधुनिक मशीनों की और ज्यादा जरूरत थी, वहां मौजूदा मशीन को भी बेच देना विभाग की बड़ी प्रशासनिक चूक है।

विशेषज्ञों की चिंता: अब कैसे होगी जांच?

मशीन बिकने के बाद अब विभाग के पास पुलों की गहराई से जांच करने का कोई तकनीकी विकल्प नहीं बचा है। वर्तमान में कई पुलों पर केवल सीमेंट का लेप लगाकर ऊपरी मरम्मत की जा रही है, जो सुरक्षा के लिहाज से नाकाफी है।

अग्रसर इंडिया का सवाल: जब प्रदेश के 46 पुल ‘डेथ ट्रैप’ बन चुके हैं, तब सुरक्षा उपकरण को कबाड़ में बेचना कितना सही है? क्या नई मशीन आने तक जनता की जान जोखिम में नहीं रहेगी?

लेखक: न्यूज़ डेस्क, अग्रसर इंडिया

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