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नमक की चाह में ‘चटोरे’ बने सांभर, भोपाल में बोट क्लब पर फास्ट फूड की दुकानों तक पहुंच रहे खाने

 

भोपाल। भोपाल के बोट क्लब क्षेत्र में इन दिनों सांभर नमक की चाह में वनविहार के जंगल से निकलकर फास्ट फूड की दुकानों के आसपास पहुंच रहे हैं और चाट-पकौड़ी व अन्य खाद्य पदार्थों की झूठन कुत्तों के साथ चाटते देखे जा रहे हैं।

क्षेत्र में मैगी, चाट-पकौड़ी, कोल्ड ड्रिंक और चिप्स-नमकीन के करीब 25 ठेले व दुकानें लगी रहती हैं, जिनसे निकलने वाला कचरा अक्सर तालाब किनारे और आसपास फैलता है।

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नमकीन स्वाद के कारण यहां तक पहुंचने लगे हैं

इसी नमकीन स्वाद के कारण सांभर अब आबादी की परवाह किए बिना यहां तक पहुंचने लगे हैं, जो उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए घातक है और संक्रमण तक जा सकता है। वन विभाग के अनुसार पिछले एक माह से वन विहार के कुछ सांभर मानव संग्रहालय, श्यामला पहाड़ी और बोट क्लब क्षेत्र के आसपास देखे जा रहे हैं।

शनिवार को विंड एंड वेव्स रेस्टोरेंट के पास तीन मादा सांभर कचरे में कुछ खाते हुए दिखाई दिए, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुए। सोमवार को भी तालाब किनारे इनके घूमने की सूचना मिलने पर वन विहार के सहायक संचालक वीरेंद्र सिंह ने सुरक्षाकर्मियों को भेजा।

मानव संग्रहालय परिस के जंगल क्षेत्र में पहुंचाया गए

टीम के पहुंचने पर तीनों सांभरों को खदेड़ी गया तो वे मानव संग्रहालय परिस के जंगल क्षेत्र में पहुंचाया गए। उन्होंने आगे बताया कि वन विहार की सुरक्षा जाली कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है और तालाब का जलस्तर कम होने से वन्यजीव बाहर निकल गए।

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जानवरों को नमक आकर्षित करता है

वे बातते हैं कि हिरण प्रजाति के जानवरों को नमक आकर्षित करता है, जिसके लिए जंगलों में खारी मिट्टी होती है। कई स्थानों पर वन विभाग इसका इंतजाम करता है लेकिन फास्ट फूड की झूठन खाना उनके लिए हानिकारक है। वन विभाग इन सांभरों को वापस वन विहार परिसर में लाने की कार्रवाई मंगवार को करेगा।

संस्थानों के सुरक्षा कर्मी निगरानी कर रहे हैं

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के संचालक अमिताभ पांडे ने बताया कि सांभर कुछ दिनों से संग्रहालय परिसर के आसपास देखे जा रहे हैं, जिसकी सूचना वन विहार प्रबंधन को दे दी गई है और दोनों संस्थानों के सुरक्षा कर्मी निगरानी कर रहे हैं।

यहां फास्ट फूड की दुकानों का होना चिंताजनक

पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है कि राष्ट्रीय उद्यान और जू के आसपास 100 मीटर तक ईको-सेंसिटिव जोन होता है, ऐसे में यहां फास्ट फूड की दुकानों का होना चिंताजनक है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन, नगर निगम और वन विभागों काम है इसे देखना और मिलकर कार्रवाई करनी चाहिए।

तले-भुने खाद्य पदार्थ प्राकृतिक आहार का हिस्सा नहीं

उनके अनुसार चिप्स, नमकीन और तले-भुने खाद्य पदार्थ वन्यजीवों के प्राकृतिक आहार का हिस्सा नहीं हैं। इन्हें खाने से पाचन तंत्र और किडनी पर प्रतिकूल असर पड़ता है तथा संक्रमण का खतरा भी बढ़ता है।

वन क्षेत्र में कचरा फेंकना वन्यजीव सुरक्षा अधीनियम 1972 के प्रविधानों का उल्लंघन माना जाता है, जिसके तहत दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रविधान है।

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