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पीएमश्री हवाई एंबुलेंस सेवा का MP के 32 जिलों में नहीं मिल पाया लाभ, एयर एंबुलेंस से 1,200 घंटे उड़ान का अनुबंध, 204 घंटे ही हो पाया उपयोग

 

स्वास्थ्य
विशेष जांच

पीएमश्री एयर एंबुलेंस फ्लॉप: 32 जिलों में जीरो केस, मरीजों को मजबूरी में तीन दिन तक का इंतजार

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बड़ी खबर: मध्य प्रदेश में गंभीर रोगियों के लिए शुरू की गई पीएमश्री हवाई एंबुलेंस सेवा विफल साबित हो रही है। प्रदेश के 32 जिलों में एक भी मरीज को यह सेवा नहीं मिल पाई, जबकि सरकार प्रति मरीज औसतन 40 लाख रुपये खर्च कर रही है।

📊 सेवा का सच: आंकड़ों में

32
जिलों में शून्य केस
17%
उड़ान क्षमता का उपयोग
127
कुल लाभान्वित (19 महीने में)
₹40 लाख
प्रति मरीज औसत खर्च

योजना की हकीकत: कागजों में बढ़िया, जमीन पर फेल

मध्य प्रदेश सरकार ने मई 2024 में गंभीर रोगियों को त्वरित चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएमश्री हवाई एंबुलेंस सेवा शुरू की थी। लेकिन डेढ़ साल बाद भी यह योजना अपने लक्ष्यों से कोसों दूर है। प्रदेश के 32 जिलों में एक भी मरीज को इस सेवा का लाभ नहीं मिल पाया है, जबकि सरकार ने विमान कंपनियों से 1,200 घंटे उड़ान के लिए अनुबंध किया था।

राजनीतिक सिफारिश जरूरी, मरीज की जरूरत नहीं

इस योजना का सबसे बड़ा दोष इसकी “राजनीतिक अनुशंसा प्रणाली” है। एयर एंबुलेंस सेवा पाने के लिए मरीज को पहले सीएमएचओ और कलेक्टर की अनुमति लेनी होती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है सांसद या विधायक की सिफारिश। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली गंभीर रोगियों के लिए बड़ी बाधा बन गई है।

“आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में राजनीतिक अनुशंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। मरीज की गंभीरता और चिकित्सकीय आवश्यकता ही एकमात्र मानदंड होना चाहिए।”
— डॉ. राजेश मालवीय, स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ

🗺️ जिलेवार स्थिति: कहां क्या हालात?

सक्रिय जिले (5)

  • रीवा: 44 मरीज
  • जबलपुर: 21 मरीज
  • भोपाल: 14 मरीज
  • छतरपुर: 11 मरीज
  • ग्वालियर: 5 मरीज

शून्य केस वाले संभाग

  • उज्जैन: 6 जिले
  • इंदौर: 5 जिले
  • जबलपुर: 4 जिले
  • ग्वालियर: 4 जिले
  • चंबल: 3 जिले

वित्तीय अपव्यय: करोड़ों का नुकसान

सरकार ने फ्लायओला कंपनी से अनुबंध किया है, जिसके तहत प्रति मरीज औसतन 40 लाख रुपये का भुगतान किया जाता है। लेकिन आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

अनुबंधित उड़ान घंटे
1,200 घंटे
वास्तविक उपयोग
204 घंटे (17%)
हेली एंबुलेंस उपयोग
7% ही उपयोग

मरीजों को तीन दिन तक का इंतजार

योजना के नियमानुसार हेलीकाप्टर और फिक्स्ड-विंग एयर आइसीयू को प्रदेश में 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध रहना था। लेकिन वास्तविकता इससे उलट है। कई मामलों में मरीजों को तीन से चार दिन तक इंतजार करना पड़ा, जबकि आपातकालीन स्थिति में हर मिनट कीमती होता है।

⏳ योजना का समयरेखा

मई 2024
पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा शुरू
मई 2024 – मई 2025
69 मरीज लाभान्वित (औसतन 6 प्रति माह)
जुलाई 2025 – जनवरी 2026
58 मरीज लाभान्वित (औसतन 10 प्रति माह)
वर्तमान
32 जिलों में शून्य केस, 127 कुल लाभान्वित

विशेषज्ञों की राय: क्या है समाधान?

1. राजनीतिक सिफारिश समाप्त करें: मरीज की चिकित्सकीय आवश्यकता ही एकमात्र मानदंड हो।
2. डिजिटल सिस्टम लागू करें: ऑनलाइन आवेदन और ट्रैकिंग सिस्टम शुरू करें।
3. जागरूकता अभियान चलाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में योजना की जानकारी पहुंचाएं।
4. विकेंद्रीकरण करें: जिला स्तर पर अधिकारियों को अनुमति देने का अधिकार दें।

📝 निष्कर्ष

पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा एक अच्छी पहल थी, लेकिन क्रियान्वयन में गंभीर खामियों के कारण यह आम जनता तक नहीं पहुंच पा रही है। 32 जिलों में शून्य केस होना यह साबित करता है कि योजना केवल कुछ शहरी और राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्रों तक सीमित है। सरकार को तत्काल इसकी समीक्षा करके सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए, वरना करोड़ों रुपये की यह योजना केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।

 

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