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प्रदेश में एक बार फिर करवट बदलेगा मौसम, ग्वालियर-चंबल, रीवा संभाग में बूंदाबांदी; कई इलाकों में बढ़ेगा पारा

 

नए पश्चिमी विक्षोभ का उत्तर पश्चिम भारत पर 16 फरवरी से असर दिख सकता है। इसका असर प्रदेश के मौसम पर भी पड़ेगा। प्रदेश के कई इलाकों में बादल छाए रहने के …और पढ़ें

HighLights

  1. खंडवा में अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस
  2. पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड
  3. 16 फरवरी से नए पश्चिमी विक्षोभ का प्रदेश पर असर

 भोपाल: प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम शुष्क रहा। निमाड़ और मालवा क्षेत्र में अधिकतम तापमान सामान्य से दो-तीन डिग्री अधिक पहुंच गया। खंडवा में अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 9.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम था।

मौसम विभाग ने 16 फरवरी से ग्वालियर, चंबल और रीवा संभाग में बूंदाबांदी की संभावना जताई है। शनिवार को भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, रीवा, जबलपुर और सागर संभागों में अधिकतम तापमान सामान्य से 1.8 से 2.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, शहडोल व सागर संभागों में सामान्य से 1.6 से 2.8 डिग्री अधिक रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.9 डिग्री अधिक है।

 

ग्वालियर-चंबल, रीवा संभाग में बूंदाबांदी के आसार

मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 15 फरवरी की सुबह तक भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में मौसम साफ रहेगा। इस दौरान 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा चलेगी। अधिकतम तापमान 32 डिग्री तक पहुंच सकता है।

16 फरवरी से नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में असर दिखा सकता है। इसकी वजह से उत्तर भारत से ठंडी हवाएं आएंगी और ग्वालियर, चंबल, इंदौर उज्जैन संभाग के न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। 16-18 फरवरी के बीच प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में हल्के बादल छा सकते हैं। यह मौसमी तंत्री अपेक्षाकृत मजबूत रहा तो ग्वालियर, चंबल, रीवा संभाग के कुछ जिलों में हल्की बूंदाबांदी की संभावना बनेगी।

फसलों पर भी होगा असर

नये मौसमी तंत्र का असर फसलों पर हो सकता है। गेहूं, चना और मसूर की फसलों के लिए हल्की ठंड और बादल लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन यदि तेज हवा चली तो खड़ी फसल को नुकसान हो सकता है।

 

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