नई दिल्ली, 02 फरवरी। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में राष्ट्रीय सुरक्षा के परिदृश्य को तकनीकी रूप से पुनर्परिभाषित करने का ऐतिहासिक फैसला किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘टेक्नोलॉजी इन नेशनल सिक्योरिटी’ के लिए एक नई एवं स्वतंत्र श्रेणी में 9,800 करोड़ रुपये के विशेष प्रावधान की घोषणा की। यह कदम एक ऐसे दौर में उठाया गया है जब आधुनिक युद्ध के मैदान का केंद्र टैंक और तोपों से हटकर साइबर स्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष तक पहुँच चुका है।
पारंपरिक से डिजिटल युद्ध की ओर बदलाव
वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा में बुनियादी बदलाव आया है। सीमाओं की सुरक्षा अब केवल जमीन पर सैन्य बल की तैनाती तक सीमित नहीं, बल्कि साइबर हमले, ड्रोन स्वार्म, उपग्रह संचार में व्यवधान, एआई-संचालित सूचना युद्ध (इन्फो वार) और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसी जटिल चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर निर्भर करती है। यह बजटीय प्रावधान इसी नई वास्तविकता को स्वीकार करते हुए, भविष्य की ‘टेक वार’ के लिए देश को सशक्त बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
फोकस क्षेत्र: यहाँ लगेगा निवेश
9,800 करोड़ रुपये की इस राशि का उपयोग रणनीतिक रूप से चुने गए अत्याधुनिक क्षेत्रों में शोध, विकास और तैनाती पर किया जाएगा:
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साइबर सुरक्षा एवं क्वांटम रेजिलिएंस: महत्वपूर्ण डिजिटल ढाँचे (पावर ग्रिड, बैंकिंग, संचार) को उन्नत साइबर हमलों से बचाना और क्वांटम कंप्यूटिंग के खतरे के मद्देनजर एन्क्रिप्शन तकनीक को मजबूत करना।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा एनालिटिक्स: सीमा पर या आतंरिक सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर डेटा (सोशल मीडिया, संचार, सेंसर डेटा) का विश्लेषण कर संभावित खतरों का पूर्वानुमान लगाना (प्रिडिक्टिव थ्रेट इंटेलिजेंस)।
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ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी: स्वदेशी निगरानी एवं हमला करने वाले ड्रोन के साथ-साथ, दुश्मन के ड्रोन स्वार्म को नष्ट करने वाली तकनीक का विकास।
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अंतरिक्ष-आधारित निगरानी एवं नेविगेशन: उपग्रहों के जरिए रियल-टाइम निगरानी क्षमता बढ़ाना और जीपीएस-स्वतंत्र नेविगेशन प्रणालियों को मजबूत करना।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण: ‘स्ट्रैटेजिक इम्परेटिव’ है यह निवेश
इस ऐतिहासिक बजटीय पहल पर देश के प्रमुख रक्षा एवं सुरक्षा विश्लेषकों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
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लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) प्रवीण बख्शी, पूर्व कोर कमांडर: “यह बजट केवल एक आर्थिक आवंटन नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत है। आज के युग में, एक साइबर हमला किसी पारंपरिक हमले से कम विनाशकारी नहीं है। यह निवेश हमारी सशस्त्र सेनाओं को ‘नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएगा, जहाँ निर्णय लेने की गति और सटीकता ही सफलता की कुंजी होगी।”
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डॉ. अर्चना दुबे, निदेशक, सेंटर फॉर साइबर सिक्योरिटी स्टडीज: “साइबर डोमेन अब युद्ध का पाँचवाँ मोर्चा है। 9,800 करोड़ का यह प्रावधान एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के रूप में कार्य करेगा। इससे न केवल हमारी रक्षात्मक क्षमता मजबूत होगी, बल्कि एक विश्वसनीय साइबर डिटरेंस की नींव भी पड़ेगी। महत्वपूर्ण यह होगा कि इस फंड का उपयोग सार्वजनिक-निजी भागीदारी और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर स्वदेशी समाधान विकसित करने में किया जाए।”
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विजय कुमार सिंह, पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार: “यह फैसला दूरदर्शिता दर्शाता है। भविष्य के संघर्ष हाइब्रिड होंगे, जहाँ फिजिकल और टेक्नोलॉजिकल थ्रेट एक साथ आएंगे। AI और डेटा एनालिटिक्स पर फोकस हमारी खुफिया एजेंसियों को भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम बनाएगा। हालाँकि, धन के आवंटन के साथ-साथ तालमेल, कुशल मानव संसाधन तैयार करना और एक मजबूत नियामक ढांचा बनाना समान रूप से महत्वपूर्ण चुनौतियाँ होंगी।”
निष्कर्ष: टेक्नो-सिक्योरिटी के नए युग की शुरुआत
बजट 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अलग से तकनीकी कोष का निर्माण एक स्पष्ट संदेश है कि भारत 21वीं सदी की सुरक्षा चुनौतियों के प्रति गंभीर और तैयार है। यह निवेश देश को न केवल प्रतिक्रियाशील सुरक्षा से आगे बढ़ाकर सक्रिय और भविष्योन्मुखी रक्षा तैयारियों की ओर ले जाएगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी नई ऊर्जा देगा। अब नजर इस बात पर टिकी है कि इस वित्तीय प्रावधान को कितनी कुशलता और गति से रणनीतिक तकनीकी क्षमताओं में बदला जाता है।



