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रीवा में 50 साल से बुजुर्ग को नहीं आई नींद, डॉक्टर बोले- यह केवल मन का भ्रम, पढ़ें क्या है यह मानसिक स्थिति?

 

Sleep Disorder: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के एक बुजुर्ग को लगता है कि उन्हें पिछल 50 वर्षों से नींद नहीं आई है। डाक्टरों ने इसे मन का भ्रम बताया है। डॉ …और पढ़ें

रीवा में 50 साल से बुजुर्ग को नहीं आई नींद, डॉक्टर बोले- यह केवल मन का भ्रम, पढ़ें क्या है यह मानसिक स्थिति?

रीवा में 50 साल से बुजुर्ग को नहीं आई नींद। (Image Source: AI-Generated)

HighLights

  1. रीवा में बुजुर्ग का हैरान करने वाला दावा
  2. 50 साल से बुजुर्ग को नहीं आई है नींद
  3. डॉक्टरों ने बताया दुर्लभ मानसिक भ्रम

भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के एक बुजुर्ग को लगता है कि उन्हें पिछल 50 वर्षों से नींद नहीं आई है। डाक्टरों ने इसे मन का भ्रम बताया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह स्लीप मिसपरसेप्शन का केस है। इसमें इंसान सोता तो है लेकिन उसे लगता है कि वह सोया ही नहीं। चिकित्सकीय परामर्श के लिए पहुंचे बुजुर्ग की डॉक्टरों ने काउंसलिंग करने की सलाह दी है।

डॉक्टरों ने क्या कहा?

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी का कहना है कि नींद उतनी ही अनिवार्य है, जितनी कि सांस लेना। कोई भी इंसान जैविक रूप से दशकों तक बिना सोये जीवित नहीं रह सकता। अकसर ऐसे मामलों के पीछे नींद की गलत धारणा नाम की एक मानसिक स्थिति होती है। इसमें मरीज सोता तो है, लेकिन उसकी नींद इतनी हल्की होती है कि उसे सुबह उठकर लगता है कि वह पूरी रात जागता रहा।

 

डॉ. त्रिवेदी कहते हैं कि यह समस्या गहरे अवसाद, चिंता या मानसिक उत्तेजना के कारण हो सकती है। जब तक मरीज का यह भ्रम नहीं टूटता कि वह सो नहीं रहा, तब तक उसका इलाज संभव नहीं है।

जेपी अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. राजेश बैरागी का कहना है कि चिकित्सकीय भाषा में इसे पैराडाक्सिकल इंसोमनिया भी कहते हैं। इसमें व्यक्ति को लगता है कि वह जाग रहा है, जबकि उसका दिमाग लाइट स्लीप मोड में होता है।

डॉ. बैरागी सलाह देते हैं कि ऐसे मरीजों को तुरंत चिकित्सकीय काउंसलिंग की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि अकसर नशे के प्रभाव या पुराने मानसिक विकारों के कारण नींद का बोध खत्म हो जाता है। ऐसे मामलों में स्लीप स्टडी के जरिए मरीज को यह दिखाया जा सकता है कि रात में उसके मस्तिष्क ने विश्राम किया है।

यह करें ऐसे मरीज

  • मेडिकल चेकअप : सबसे पहले किसी मनोचिकित्सक से मिलें। यह जांचना जरूरी है कि कहीं यह किसी छिपे हुए मानसिक रोग का लक्षण तो नहीं।
  • स्लीप डायरी बनाएं : सोने और जागने के समय को नोट करें। परिवार का कोई सदस्य भी रात में मरीज की गतिविधियों पर नजर रखे कि क्या वह वास्तव में जाग रहा है या स्थिर है।
  • नशे से परहेज : चाय, काफी, तंबाकू या शराब से पूरी तरह दूरी बना लें, क्योंकि ये नींद के चक्र को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
  • बिस्तर का सही उपयोग : बिस्तर पर केवल सोने के समय ही जाएं। वहां बैठकर खाना खाना या मोबाइल चलाना बंद करें।
  • योगाभ्यास : मन को शांत करने के लिए प्राणायाम और ध्यान का सहारा लें। इससे डीप स्लीप (गहरी नींद) की अवधि बढ़ाने में मदद मिलती है।

 

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