भोपाल: प्रदेश में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर कई सवाल उठे हैं। विधानसभा में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में बताया किया वक्फ संपत्तियों के पंजीयन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। सामुदायिक प्रयोजन के लिए आरक्षित भूमि को भी बोर्ड ने वक्फ के रूप में शामिल किया। इनका बाजार मूल्य 77 करोड़ रुपये आंका गया है। इतना ही नहीं जंगल की संपत्ति को भी वक्फ की संपत्ति में दिखाया गया। प्रशासन की उदासीनता भी कई बार सामने आई।
कलेक्टर की आपत्तियां दरकिनार
जांच में सामने आया कि बोर्ड ने जिला प्रशासन की आपत्तियों को दरकिनार किया। दो आवदेकों ने धार के बसंत विहार कॉलोनी स्थित अपने 66.87 वर्गमीटर वाले मकानों को मस्जिद के उद्देश्य से वक्फ के रूप में पंजीकृत करने के लिए आवेदन दिया। कलेक्टर ने मकानों को वक्फ के रूप में पंजीकृत करने आपत्ति जताते हुए अनापत्ति जारी करने से मना कर दिया।
इसके बाद भी बोर्ड ने 18 नवंबर 2022 को संपत्तियों को वक्फ के रूप में पंजीकृत कर दिया और आपत्तियों को समयसीमा 30 दिन समाप्त समाप्त होने का हवाला देकर अस्वीकार कर दिया।कलेक्टर ने बोर्ड द्वारा जारी पंजीकरण निरस्त करने का आदेश जारी किया पर नहीं माना गया। मामला न्यायाधिकरण में है। वक्फ संपत्तियों की जांच में यह भी पाया गया कि 81 में से लगभग आधी संपत्ति सरकारी जमीन थी।
क्रबिस्तान बताकर पंजीयन
ऐसा ही एक प्रकरण भोपाल के मिसरोद में सामने आया। यहां जिस जमीन पर स्कूल और पुलिस स्टेशन है, उसे कब्रिस्तान बताकर पंजीकृत किया गया। तहसीलदार, पुलिस स्टेशन के प्रभारी ने भी आपत्तियां कीं लेकिन बोर्ड ने फिर भी पंजीयन किया।
विदिशा जिले में हलाली जलाशय क्षेत्र में 410 वर्गमीटर जंगल की जमीन को वक्फ के तौर पर पंजीकृत कर दिया, जबकि इसे वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत पट्टे पर दिया था लेकिन जनवरी 2023 में औकाफ रजिस्टर में दर्ज कर दिया गया।
भोपाल के संजय नगर लेंडिया तलब में 19.80 वर्ग मीटर क्षेत्र वाली भूमि को शासन ने जून 1994 में 30 वर्ष के पट्टे पर एक पट्टेदार को हस्तांतरित किया था। शर्त यह तय थी कि इसका स्वामित्व शासन के पास रहेगा, जिसका हस्तांतरण नहीं होगा। आवासीय उद्देश्य के अलावा किसी अन्य उपयोग की अनुमति नहीं है।
जांच में यह पाया गया कि अगस्त 2021 में संपत्ति को औकाफ पंजी में वक्फ के रूप में पंजीकृत करने के लिए बोर्ड में आवेदन दिया गया। भूमि अवैध कब्जे में है और इसे शासन को अपने अधीन लेना चाहिए।
किराया संशोधन ना होने के कारण बोर्ड को नुकसान
वक्फ प्रबंधन समिति के अभिलेखों की जांच में पाया गया कि भोपाल स्थित 3,887 आवास, व्यवसाय एवं उद्देश्य के लिए जो संपत्तियां हैं उनका मासिक किराया मात्र दो रुपये लिया जा रहा था। समिति ने दिसंबर 2020 में बोर्ड को जानकारी प्रस्तुत की और पट्टा नियम 2020 के अनुसार वसूले जाने योग्य किराए और वास्तविक किराए के बीच 1.35 करोड़ प्रतिमाह का अंतर दर्शाया।
बोर्ड के अभिलेखों की जांच के दौरान यह भी देखा गया कि 14,000 से अधिक वक्फ पंजीकृत थे लेकिन 2018-19 से 20-21 के दौरान केवल दो से तीन प्रतिशत ने ही अपने लेख बोर्ड को प्रस्तुत किए।




