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टेलीग्राम चैनल पर 11वीं फेल ने 10-12वीं के 50 फर्जी पेपर बेचे, पढ़ाई छोड़कर फलों का ठेला लगाता था युवक

 

10-12वीं परीक्षा के फर्जी पेपरलीक मामले में क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने कार्रवाई करते हुए राजगढ़ से एक ठग को गिरफ्तार किया। आरोपित 11वीं फेल है और फ …और पढ़ें

 

टेलीग्राम चैनल पर 11वीं फेल ने 10-12वीं के 50 फर्जी पेपर बेचे, पढ़ाई छोड़कर फलों का ठेला लगाता था युवक

टेलीग्राम चैनल पर युवक ने 10-12वीं के 50 फर्जी पेपर बेचे

HighLights

  1. फर्जी पेपरलीक मामले में क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई
  2. क्राइम ब्रांच ने राजगढ़ से एक ठग को गिरफ्तार किया है
  3. आरोपित 11वीं फेल है और फलों का ठेला लगाता है

भोपाल। 10-12वीं परीक्षा के फर्जी पेपरलीक मामले में क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने कार्रवाई करते हुए राजगढ़ से एक ठग को गिरफ्तार किया। आरोपित 11वीं फेल है और फलों का ठेला लगाता है। उसने टेलीग्राम पर चैनल बनाकर छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को जोड़ा। साथ ही बोर्ड परीक्षा से पहले उन्हें पेपर उपलब्ध करवाने का दावा किया।

बाद में 500 से एक हजार रुपये में उन्हें पूर्व के वर्षों के प्रश्नपत्र और सॉल्वड पेपर थमा दिए। आरोपित परीक्षा के दौरान 50 से ज्यादा लोगों को फर्जी पेपर बेच चुका था। मामले में क्राइम ब्रांच ने करीब एक महीने पहले केस दर्ज किया था। शुक्रवार को आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

 

चैनल में जुड़े थे हजारों छात्र व अभिभावक

एसआई अंकित नायक ने बताया कि 22 वर्षीय अरुण मालवीय राजगढ़ जिले में खुजनेर के मालवीय मोहल्ला का रहने वाला है। उसने 11वीं कक्षा में ही परीक्षा दिए बिना पढ़ाई छोड़ दी थी। आरोपित फल खुजनेर में फल का ठेला लगाता है। पूछताछ में उसने बताया कि परीक्षा से पहले mpboardpaperleakkkk नाम से टेलीग्राम चैनल बनाया था। उसमें हजारों विद्यार्थी और उनके अभिभावक जुड़े थे।

चैनल पर वह माध्यमिक शिक्षा मंडल का लोगो व नाम का उपयोग करता था। वह ग्रुप में पेपरलीक की फर्जी सूचनाएं भेजता था। जो सदस्य उसमें रुचि दिखाते तो उन्हें एक अलग टेलीग्राम चैनल में जोड़ता। साथ ही 500 से एक हजार रुपये में बेचने की डील करता था। परीक्षा से एक दिन पहले वह पुराने सालों के पेपर एडिट करके या सॉल्वड पेपर भेज देता था।

ऑनलाइन गेमिंग का शौकीन है आरोपित

एसआई नायक के अनुसार आरोपित ठग ऑनलाइन गेमिंग का भी शौकीन है और पुलिस जांच में मनी ट्रेल से बचने के लिए वह साइबर ठगी की राशि अपने गेमिंग वॉलेट में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाता था। इसके बाद वह अपने दोस्तों-रिश्तेदारों या कियोस्क संचालक के खाते में रुपये डालकर उनसे नकद राशि लेता था।

परीक्षा के दौरान इस तरह ठगी से उसने 20 हजार रुपये से ज्यादा की कमाई करना स्वीकार किया है। इसमें से कुछ राशि उसने गेमिंग में भी खर्च की है।

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