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विजय शाह मामले में दिल्ली के कानूनविदों से राय के बाद होगा फैसला, नौ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

 

मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी के मामले में अभियोजन स्वीकृति के संबंध …और पढ़ें

विजय शाह मामले में दिल्ली के कानूनविदों से राय के बाद होगा फैसला, नौ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन खत्म

HighLights

  1. विजय शाह से त्यागपत्र लेने के पक्ष में भाजपा नहीं है
  2. उनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमति देना नहीं चाहती
  3. कानूनविदों से विजय शाह मामले में राय ली जाएगी

भोपाल। मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी के मामले में अभियोजन स्वीकृति के संबंध में निर्णय लिए जाने की सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दो हफ्ते की समयावधि पांच फरवरी (गुरुवार) को समाप्त हो रही है। इस मामले में विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार को अगले दो-तीन दिन में निर्णय करना होगा।

त्यागपत्र लेने के पक्ष में भाजपा नहीं

आदिवासी वर्ग से होने के कारण विजय शाह से त्यागपत्र लेने के पक्ष में भाजपा नहीं है और न ही सरकार उनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमति देना चाहती है। इसी वजह से प्रदेश भाजपा संगठन और सत्ता इस मामले में निर्णय के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर देख रहे हैं। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भी दिल्ली प्रवास के दौरान बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट की है। इस विषय पर चर्चा हुई।

 

दिल्ली के बड़े कानूनविदों से विजय शाह मामले में राय ली जाएगी

सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात के बाद दिल्ली के बड़े कानूनविदों से विजय शाह मामले में राय ली जाएगी। अटार्नी जनरल से भी इस बारे में सलाह लेकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यह भी बताया गया है कि राज्य सरकार कानूनी पहलुओं का हवाला देकर नौ फरवरी की होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट से और समय की मांग कर सकती है।

बता दें, सोफिया कुरैशी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणियों के लिए विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआइटी जांच का सामना करना पड़ा। 19 जनवरी को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा था कि एसआइटी ने जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। हालांकि, आगे की कार्यवाही रुक गई है क्योंकि रिपोर्ट को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 के तहत राज्य सरकार से अनिवार्य अनुमति का इंतजार है। यह धारा सांप्रदायिक घृणा और दुर्भावना को बढ़ावा देने से संबंधित है।

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