Munawar Khan back to India: मुन्नावर खान, का नाम भारत के जांच अधिकारियों के लिए कोई नया नहीं था. वह जालसाजी और धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में सीबीआई का वांछित अपराधी था. चो चलिए आपको बताते हैं मुन्नावर खान की क्…और पढ़ें
पकड़ा गया मुन्नावर खानअक्सर हम फिल्मों में देखते हैं कि कोई बड़ा अपराधी विदेश भाग जाता है और फिर उसे पकड़कर वापस लाना एक लंबी और पेचीदा प्रक्रिया बन जाती है.लेकिन असल जिंदगी में भी ऐसे कई मामले सामने आते हैं. हाल ही में ऐसा ही एक मामला भारत में चर्चा का विषय बना, जब CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) ने इंटरपोल चैनलों की मदद से कुवैत से वांछित भगोड़े मुन्नावर खान की वापसी सफलतापूर्वक करवाई. लेकिन अब सवाल उठता है कि आखिर मुन्नावर खान कौन है? अगर आपको भी नहीं पता तो चलिए हम आपको बताते हैं.
मुन्नावर खान, का नाम भारत के जांच अधिकारियों के लिए कोई नया नहीं था. वह जालसाजी और धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में सीबीआई का वांछित अपराधी था. यह मामला इतना गंभीर था कि उसके खिलाफ इंटरपोल ने रेड नोटिस जारी किया था, जो दुनिया भर के 195 देशों में किसी भगोड़े को पकड़ने के लिए एक वैश्विक अलर्ट होता है. मुन्नावर ने सोचा था कि कुवैत में छिपकर वह भारतीय कानून की पहुंच से बच जाएगा, लेकिन सीबीआई को धोखा देना उसके बस का नहीं था.
पकड़ा गया मुन्नावर खान
अब 11 सितंबर 2025 के दिन भारत की जांच एजेंसी के लिए एक बड़ी जीत का दिन बन गया. इस दिन मुन्नावर खान को कुवैत पुलिस के एक दल ने राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, हैदराबाद पहुंचाया. यहां सीबीआई की विशेष शाखा, चेन्नई की टीम ने उसे हिरासत में लिया. लेकिन इस सफलता के पीछे की कहानी उतनी आसान नहीं थी, जितनी दिखती है.
सीबीआई की इंटरनेशनल पुलिस कोऑपरेशन यूनिट (IPCU) ने इस ऑपरेशन को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई. यह यूनिट भारत का इंटरपोल के साथ आधिकारिक संपर्क करता है. सीबीआई ने कुवैत की नेशनल सेंट्रल ब्यूरो (NCB) और भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ मिलकर इस मिशन को कामयाब बनाया. महीनों की प्लानिंग और कूटनीतिक बातचीत के बाद मुन्नावर की लोकेशन का पता चला. कुवैत में वह गुप्त रूप से रह रहा था, लेकिन इंटरपोल के रेड नोटिस ने उसे छिपने नहीं दिया.
मुन्नावर खान पर क्या आरोप है
मुन्नावर खान पर आरोप हैं कि उसने जालसाजी और धोखाधड़ी के जरिए कई लोगों को ठगा. वह अपने शातिर दिमाग का इस्तेमाल कर दस्तावेजों की हेरफेर करता और लोगों का भरोसा जीतकर बड़ी रकम हड़प लेता. जब भारत में उसके खिलाफ जांच शुरू हुई तो वह कानून के शिकंजे से बचने के लिए देश छोड़कर कुवैत भाग गया. वहां उसने खुद को छिपाकर रखा और सोचा कि अंतरराष्ट्रीय सरहदें उसे बचा लेंगी. लेकिन सीबीआई और इंटरपोल की सक्रियता ने उसकी ये उम्मीदें तोड़ दीं.




