एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल में पर्यावरण को बड़ा झटका: कलियासोत डैम क्षेत्र में पौधरोपण के नाम पर कटे 700 पेड़; NGT ने लिया कड़ा संज्ञान, राज्य सरकार को नोटिस
भोपाल: राजधानी भोपाल के संवेदनशील कलियासोत डैम क्षेत्र स्थित स्टेट डेयरी फार्म में पौधरोपण के नाम पर भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। जमीन तैयार करने के लिए कथित तौर पर 700 से अधिक परिपक्व पेड़ों को जड़ समेत उखाड़ने और काटने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने पर्यावरण से जुड़े इस गंभीर मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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700 पेड़ों की कटाई: कलियासोत डैम क्षेत्र स्थित स्टेट डेयरी फार्म की करीब 8 एकड़ जमीन पर 10,000 पौधे लगाने के लिए नगर निगम द्वारा एक एजेंसी को टेंडर दिया गया था, जिस दौरान वहां पहले से मौजूद सैकड़ों हरे-भरे पेड़ नष्ट कर दिए गए।
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एनजीटी का कड़ा दखल: एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है।
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तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित: मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एनजीटी ने कलेक्टर के प्रतिनिधि, पर्यावरण वानिकी वनमंडल के संभागीय वन अधिकारी (DFO) और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि को मिलाकर एक संयुक्त समिति बनाई है।
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बिना अनुमति के पेड़ों का विनाश: याचिकाकर्ता के अनुसार, बबूल, बेर, शीशम, गूलर और महुआ जैसे परिपक्व पेड़ों को हटाने से पहले मध्य प्रदेश वृक्ष (नगरीय क्षेत्र) संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत कोई वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता प्रभात पांडे ने एनजीटी को बताया कि स्टेट डेयरी फार्म क्षेत्र में पौधरोपण के नाम पर अर्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा जेसीबी का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर पेड़ों को तहस-नहस किया गया। नए पौधे लगाने के चक्कर में पहले से फल-फूल रहे और पर्यावरण को संतुलित रखने वाले पुराने पेड़ों को जड़ से उखाड़ फेंकना गंभीर चिंता का विषय है। अब एनजीटी द्वारा गठित संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।




