एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की वित्तीय फिजूलखर्ची पर उठे बड़े सवाल: ‘विकसित भारत 2047’ संगोष्ठी में 500 मेहमानों पर खर्च किए गए 12 लाख रुपये, भोजन की थाली पर उठे संशय
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली और भारी-भरकम खर्चों को लेकर सुर्खियों में आ गया है। वर्ष 2023 में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी के दौरान हुए खर्चों के आंकड़े सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की वित्तीय प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक पूर्व छात्र द्वारा आरटीआई (RTI) के तहत निकाली गई जानकारी से खुलासा हुआ है कि एक दिन के कार्यक्रम में भोजन और हाई-टी पर पानी की तरह पैसा बहाया गया, जबकि यूनिवर्सिटी परिसर की प्रयोगशालाओं और कक्षाओं में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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आरटीआई से हुआ बड़ा खुलासा: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र धर्मेंद्र सिंह द्वारा आरटीआई के तहत प्राप्त की गई जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय ने ‘विकसित भारत 2047: स्टूडेंट इन्वाल्वमेंट इन आइडियाज फार द विजन’ विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी पर कुल लगभग 12 लाख रुपये खर्च कर दिए।
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भव्य आयोजन और बेहिसाब खर्च: 11 दिसंबर 2023 को आयोजित इस संगोष्ठी में करीब 500 अतिथि शामिल हुए थे। खर्च के ब्योरे के मुताबिक:
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हॉल का किराया: मिंटो हॉल का एक दिन का किराया 2 लाख रुपये चुकाया गया।
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हाई-टी का खर्च: 500 लोगों की हाई-टी (चाय, कॉफी, कुकीज और वेज सैंडविच) पर 1.25 लाख रुपये यानी प्रति व्यक्ति लगभग 250 रुपये खर्च किए गए।
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शाही दोपहर का भोजन: लंच पर करीब 7 लाख रुपये खर्च हुए, जिसके हिसाब से प्रति प्लेट 1,400 रुपये का भुगतान किया गया।
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बाजार दर से दोगुनी थी प्लेट की कीमत: मेन्यू में स्प्राउट सलाद, सूप, फ्रूट रायता, दाल तड़का, कढ़ाई पनीर, जीरा राइस, मेथी मटर मलाई, आलू-गोभी, रोटी और आइसक्रीम शामिल थे। जब शिकायतकर्ता ने अन्य होटलों से इस मेन्यू की पड़ताल की, तो समान भोजन की कीमत बाजार में 700 से 800 रुपये प्रति प्लेट पाई गई, जो बीयू द्वारा चुकाई गई राशि से लगभग दोगुनी है।
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बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी पर सवाल: पूर्व छात्र ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर वित्तीय अनियमितता और फिजूलखर्ची का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि एक तरफ जहां बीयू की प्रयोगशालाओं में पुराने उपकरण पड़े हैं, कक्षाओं में सुविधाओं का अभाव है और वाई-फाई जैसी बुनियादी जरूरतें अधूरी हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के आयोजनों पर जनता के पैसों की बर्बादी की जा रही है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष: इस पूरे मामले पर बीयू के कुलसचिव समर बहादुर सिंह का कहना है कि पूर्व विद्यार्थी ने फिजूलखर्ची को लेकर जांच की मांग उठाई है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण और बड़े कार्यक्रम इसलिए मिंटो हॉल जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं, ताकि आयोजन में भव्यता और गरिमा बनी रहे।




