बड़े तालाब के 50 मीटर एफटीएल दायरे में चिन्हित करीब 400 अतिक्रमणों पर छह आपत्तियों के निराकरण के बाद फिर से कार्रवाई शुरू की जाएगी।

इसी लेक हाउस के सीमांकन के दौरान गड़बड़ी का मामला सामने आया। फाइल फोटो।
HighLights
- 18 जून के एफटीएल सीमांकन में गड़बड़ी, दो सहायक यंत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी
- बड़े तालाब के 50 मीटर एफटीएल दायरे में चिन्हित करीब 400 अतिक्रमणों पर फिर से कार्रवाई होगी
- रिकॉर्ड के विपरीत तथ्य या लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी
भोपाल। बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) के 50 मीटर दायरे में चिह्नित अतिक्रमणों के 18 जून को हुए सीमांकन पर सवाल उठने और उसमें शामिल दो सहायक यंत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद निगम ने अपनी रणनीति बदल ली है। अब झील संरक्षण प्रकोष्ठ द्वारा पूर्व में कराए गए सीमांकन को कार्रवाई का आधार बनाने का फैसला किया है।
सीमांकन पर जताई गई थी आपत्ति दर्ज
जानकारी के अनुसार, अब नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि अतिक्रमणों पर आगे की कार्रवाई झील संरक्षण प्रकोष्ठ द्वारा कराए गए सीमांकन के आधार पर ही की जाएगी। दरअसल, जिला प्रशासन और नगर निगम ने फरवरी-मार्च 2026 में सर्वे कर बड़े तालाब के एफटीएल के 50 मीटर दायरे में करीब 400 अतिक्रमण चिह्नित किए थे। इनमें से छह लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी कि उनके सामने सीमांकन नहीं हुआ।
इसके बाद 18 जून को राजस्व अमले की मौजूदगी में दोबारा सीमांकन कराया गया। इसमें कृष्णा घाड़गे के फार्म हाउस सहित कुछ निर्माणों को एफटीएल सीमा से बाहर बताया गया। इस पंचनामे पर भवन अनुज्ञा शाखा के सहायक यंत्री प्रदीप कुमार जड़िया और झील संरक्षण प्रकोष्ठ के तत्कालीन सहायक यंत्री आदित्य खरे ने हस्ताक्षर किए थे।
समीक्षा में सामने आई गड़बड़ी
एनजीटी प्रकरण की समीक्षा में निगम आयुक्त ने पाया कि पंचनामे में दर्ज तथ्य झील संरक्षण प्रकोष्ठ के रिकार्ड से मेल नहीं खाते। साथ ही निगम अधिकारियों ने रिकॉर्ड के विपरीत तथ्यों पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई और न ही भोज वेटलैंड संरक्षण से जुड़े मामले में निगम का पक्ष रखा। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए दोनों सहायक यंत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
अब इन छह आपत्तियों का दोबारा निराकरण कर एफटीएल के 50 मीटर दायरे में आने वाले अतिक्रमणों पर निगम दोबारा कार्रवाई शुरू कर सकता है। हालांकि, जिस फार्म हाउस के सीमांकन में गड़बड़ी हुई है उसके पास से एफटीएल के मुनार गायब कर दी गई है और सीमांकन के दौरान लगाया गया निशान भी नहीं लगा है।
दोनों सहायक यंत्रियों ने तैयार किए अपने जवाब
नोटिस मिलने के बाद दोनों सहायक यंत्रियों ने अपने जवाब तैयार कर लिए हैं। उनका कहना है कि पुराने सीमांकन का विधिवत प्रमाणीकरण उपलब्ध नहीं है। साथ ही 18 जून को हुआ सीमांकन राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया था और पंचनामा सभी संबंधित अधिकारियों की सहमति से तैयार हुआ था।
इन्हें जारी किए गए नोटिस
आदित्य खरे : आदित्य खरे ने उपयंत्री के पद पर नगर निगम में ज्वाइन किया था। जब बड़े तालाब का सीमांकन हुआ, उस समय झील संरक्षण प्रकोष्ठ में सहायक यंत्री थे। अभी जोन-आठ में सिविल शाखा में पदस्थ हैं।
प्रदीप कुमार जड़िया : प्रदीप कुमार जड़िया ने उपयंत्री के पद पर नगर निगम में ज्वाइन किया था। जब बड़े तालाब का सीमांकन हुआ, उस समय भवन अनुज्ञा शाखा में सहायक यंत्री थे। अभी जोन-सात और 17 की भवन अनुज्ञा शाखा में हैं।
बड़े तालाब का संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एफटीएल और 50 मीटर दायरे से जुड़े मामलों में उपलब्ध रिकार्ड और वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया में लापरवाही या रिकार्ड के विपरीत तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।- संस्कृति जैन, आयुक्त, नगर निगम




