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खेतों में फसल की चिंता, सड़कों पर जान का खतरा; विधानसभा में गूंजा ‘निराश्रित गोवंश’ का मुद्दा, रात में निकलना हुआ मुश्किल

 

 भोपाल। निराश्रित गोवंश के कारण किसान रात-रातभर सो नहीं पाते हैं। वे टार्च लेकर खेतों में घुसे गोवंश को बाहर करते रहते हैं। नेशनल हाईवे हो या स्टेट हाईवे, पूरे प्रदेश में रात में निकलना खतरे से खाली नहीं रह गया है। स्थिति यह है कि सोचना पड़ता है कि रात में निकलें या बंद कर दें।

नर्मदापुरम अंचल की सड़कों के लिए स्टे केटल वीकल का जो प्रविधान किया गया है, उसे सभी प्रमुख मार्गों पर लागू किया जाना चाहिए। यह बात विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से अजय सिंह ने उठाई। पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने भी इस पर चिंता जताते हुए समाधान पर ध्यान देने की बात की।

 

पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल ने दावा किया कि गो-अभयारण्य बना रहे हैं। दो साल में कोई गोवंश सड़क पर नहीं मिलेगा।

अजय सिंह ने कहा कि आप दूर मत जाइए, भोपाल शहर की सड़कों पर ही देख लें कितने निराश्रित पशु ऐसे घूम रहे हैं। राजेंद्र पांडेय ने कहा कि तेजी से विकास और लगातार बनती सड़कों के कारण आखिरकार जीव-जंतु कहां जाएं। नीलगाय के कारण फसलें नष्ट हो रही हैं। संभागीय मुख्यालयों पर बड़े गो-अभयारण्य या ऐसे वन क्षेत्र घोषित करने पर विचार होना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि जब गाय दूध नहीं देती है तब पशुपालक उनको छोड़ता है। जो 40 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु गोशाला को दे रहे हैं, वह पशुपालक को दें तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो सकता है। गोशालाओं में गाय की मृत्यु के बाद क्या होगा? उसको कैसे दफनाया जाएगा? इस बारे में भी व्यवस्था होना चाहिए क्योंकि सच्चाई यह है कि गोमांस भी बिक रहा है।

आस्ट्रेलिया और दुबई के लोग खोलेंगे गोशाला

विभागीय मंत्री लखन पटेल ने बताया कि देश की पहली स्वावलंबी गोशाला योजना मध्य प्रदेश में लागू की गई है। 25 जिलों में 29 स्थान चयनित कर टेंडर प्रक्रिया की गई। जबलपुर में 461 एकड़ भूमि, रायसेन में 320, दमोह में 520, सागर में 411, अशोक नगर में 293, खरगोन में 133 और रीवा में 135 एकड़ भूमि पर गोशाला स्थापित करने के टेंडर हो गए हैं। आस्ट्रेलिया और दुबई से लोगों ने टेंडर डाले हैं। प्रयास है कि जून के पहले शेड बन जाएं ताकि सड़कों पर जो गोवंश होगा, उनको विस्थापित कर सकें।

133 जेलों में क्षमता से 35.76 प्रतिशत अधिक बंदी

प्रदेश की जेलों में बंदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नौबत यहां तक आ गई है कि बंदियों को रखने के लिए जेल कम पड़ने लगी हैं। इनमें क्षमता से अधिक बंदी रखे जा रहे हैं। प्रदेश की 133 जेलों में 42 हजार 119 बंदी हैं, जो क्षमता से 35.76 प्रतिशत अधिक हैं। राज्य में एक भी महिला जेल नहीं है। हालांकि, प्रत्येक जेल में अलग महिला वार्ड है। वहीं सुरक्षा तकनीक भी केंद्रीय जेल भोपाल को छोड़ अन्य जिलों में नहीं अपनाई गई।

यह जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में खातेगांव (देवास) विधायक आशीष शर्मा के प्रश्न के लिखित जवाब में दी।

 

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