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किसानों की बड़ी जीत, अब MSP से कम पर नहीं बिकेगी सरसों, केंद्र ने दी भावांतर योजना को मंजूरी

 

भोपाल। प्रदेश में सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। उन्हें अब अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दर पर नहीं बेचनी पड़ेगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को दिल्ली में हुई बैठक में भावांतर के अंतर्गत किसानों से सरसों की उपज खरीदने की स्वीकृति दे दी। इस बैठक में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल सहित केंद्र व राज्य के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

बता दें कि प्रदेश सरकार 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इस दृष्टि से किसानों के हित में यह बड़ा निर्णय है। बैठक में कृषि मंत्री ने भावांतर के अंतर्गत खरीदी में संबंधित विभागों को भुगतान प्रक्रिया तेज करने के लिए कहा है। उन्होंने तुअर (अरहर) की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद का भरोसा देते हुए इसका स्वीकृति पत्र भी सौंपा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि से संबंधित विषयों को लेकर मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता मिलेगी। सुनिश्चित किया जाएगा कि सरसों, तुअर, मूंग, उड़द और तिलहनों की खेती करने वाले किसानों को हर संभव मदद मिले और राज्य ग्रामीण विकास के हर पैमाने पर अग्रणी बने।

दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने की बनेगी रणनीति

मोहन यादव बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश को दलहन और तिलहन उत्पादन का अग्रणी राज्य बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पर केंद्र और राज्य की संयुक्त टीम द्वारा मूंग, उड़द, चना, तिल, सरसों और पाम आयल जैसी फसलों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी।

उन्होंने बताया कि बैठक में कृषि से जुड़े अन्य विषयों, विकसित भारत-जी राम जी कार्यक्रम के क्रियान्वयन, पीएम आवास योजना, सोयाबीन के भावांतर भुगतान, दलहन मिशन के अंतर्गत मूंग-उड़द के अतिरिक्त लक्ष्य, मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता कार्यक्रम, मनरेगा मजदूरी और सामग्री भुगतान, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, आजीविका मिशन एवं स्वयं सहायता समूहों से संबंधित विषयों की समीक्षा की गई।

शिवराज बोले-लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाएं

शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने को कहा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों के हित को देखते हुए उन्होंने सोयाबीन जैसी फसलों के आंकलन में केवल सैटेलाइट डेटा की जगह क्राफ कटिंग और रिमोट सेंसिंग तरीकों का उपयोग करने के निर्देश दिए। ताकि किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा मिल सके।

200 रुपये प्रति क्विंटल तक होगा किसानों का लाभ

सरसों का एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल है, पर प्रदेश में बाजार में इसकी कीमत 6000 रुपये के आसपास है। इस तरह लगभग 200 रुपये सरकार भावांतर देगी। हाल ही में विधानसभा में मुख्यमंत्री ने बताया था कि इस वर्ष सरसों की खेती का क्षेत्रफल लगभग 28 प्रतिशत बढ़ा है। प्रति वर्ष लगभग 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जाती है। ग्वालियर-चंबल के जिले इसके मुख्य उत्पादक हैं।

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