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35 दिन बाद भी फाइलों में अटका सुधार

 

भोपाल। देश में चर्चित राजधानी का ऐशबाग 90 डिग्री ओवरब्रिज पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की लापरवाही और सुस्त कागजी कार्रवाई का शिकार हो गया है। ब्रिज के खतरनाक मोड़ को सुधारने पर रेलवे और पीडब्ल्यूडी के बीच 35 दिन पहले सहमति बन चुकी थी, लेकिन सुधार कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बना ओवरब्रिज पिछले 11 महीनों से बंद पड़ा है और जनता सिर्फ इसके शुरू होने का इंतजार कर रही है।

तकनीकी गलती से फिर अटका मामला

सात अप्रैल को हुई बैठक में तय किया गया था कि ब्रिज के तीखे मोड़ का रेडियस 2 से बढ़ाकर 2.5 मीटर किया जाएगा। उम्मीद थी कि एक सप्ताह के भीतर काम शुरू हो जाएगा, लेकिन पीडब्ल्यूडी द्वारा भेजे गए तकनीकी प्रस्ताव में कई खामियां निकल आईं।

इसके बाद रेलवे ने पीडब्ल्यूडी को नोटिस जारी कर प्रस्ताव दोबारा जमा करने को कहा। चार दिन पहले हुई बैठक के बाद संशोधित प्रस्ताव फिर से जमा किया गया है।

अब टेबल-टेबल घूम रही फाइल

सूत्रों के मुताबिक अब री-डिजाइन की फाइल मंजूरी के लिए भोपाल रेल मंडल कार्यालय में अलग-अलग टेबलों पर घूम रही है। यहां से अप्रूवल मिलने के बाद फाइल जबलपुर भेजी जाएगी, जहां अंतिम मंजूरी दी जाएगी।

विभागीय प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को देखकर माना जा रहा है कि सुधार कार्य शुरू होने में अभी और समय लग सकता है।

जनता को करना पड़ रहा इंतजार

एक तरफ शहर के लोग इस ओवरब्रिज के खुलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय कागजी कार्रवाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही।

री-डिजाइन पर सहमति बन चुकी है। सबमिशन में कुछ तकनीकी खामियां थीं, जिन्हें दूर कर दिया गया है। अब अप्रूवल प्रक्रिया में थोड़ा समय लगेगा।- अनुपम अवस्थी, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, गति शक्ति, भोपाल मंडल

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