भोपाल। शहर में घरेलू गैस सिलिंडरों लेने को लेकर उपभोक्ताओं में घबराहट जारी है। हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं, कई बार नंबर लगाने पर बुकिंग हो रही है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को सिलिंडर नहीं मिल रहा है। वहीं ऑनलाइन बुकिंग नहीं होने से उपभोक्ता एजेंसी पर पहुंचकर ऑफलाइन बुकिंग करवा रहे हैं, फिर भी इंतजार ही हाथ लग रहा है। इधर प्रशासन का दावा है कि एलपीजी का पर्याप्त भंडारण है, फिर भी एजेंसी संचालक मनमानी कर रहे हैं।
हालात यह हैं कि पांच से 10 दिन पहले से बुकिंग वाले उपभोक्ताओं को एजेंसी पहुंचने पर भी सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं और वह तेज धूप में परेशान होने को मजबूर हैं। जानकारी के अनुसार साढ़े पांच लाख घरेलू सिलिंडर के उपभोक्ता हैं तो वहीं करीब 40 हजार व्यावसायिक सिलिंडर के उपभोक्ता हैं।
व्यावसायिक सिलिंडर पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, जबकि घरेलू सिलिंडर उपभोक्ताओं को समय पर नहीं मिल रहा है। यह हालात बीते छह दिनों से बने हुए हैं, ऐसे में लोग 40 से अधिक गैस एजेंसी और गोदाम पर उपभोक्ता सिलिंडर लेने पहुंच रहे हैं, जहां लोगों की गैस संचालकों व कर्मचारियों से ऑनलाइन बुकिंग नहीं होने पर बहसबाजी व विवाद हो रहे हैं।
ईदगाह हिल्स, नेहरू नगर, जवार चौक, अवधपुरी, बैरागढ़, कोलार सहित अन्य गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की सुबह से दोपहर तक भीड़ लगी रही। जिन उपभोक्ताओं की पर्चियां काटी गईं, उन्हें सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक इंतजार करने के बाद रसोई गैस सिलिंडर मिला। वहीं कई ऐसे लोग थे, जिन्हें गैस सिलिंडर नहीं मिला और एक सप्ताह या इससे अधिक दिन पहले जिन लोगों ने रसोई गैस सिलिंडरों की बुकिंग की थी, उनके घरों पर भी सिलिंडरों की डिलीवरी नहीं हो सकी। एक सप्ताह तक लोगों की बुकिंग है, जिसकी आपूर्ति नहीं हो रही है।
गैस एजेंसी व गोदामों पर पहुंचे एसडीएम
तहसीलदार सिलिंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए गठित दलों ने शनिवार को एसडीएम, तहसीलदार के नेतृत्व में गैस एजेंसी व गोदामों का निरीक्षण किया। संत हिरदारात नगर तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह ने भैंसाखेड़ी भारत व इंडेन गैस एजेंसी की जांच कर संचालकों को चेतावनी दी कि व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति होटल व रेस्टोरेंटों को न करें।
इसी तरह शहर वृत्त के एसडीएम दीपक पांडेय ने जिंसी चौराहे पर दो गैस एजेंसियों की जांच की। गोविंदपुरा एसडीएम भुवन गुप्ता के निर्देश पर टीम ने मिनाल व अशोका गार्डन में दो गैस एजेंसियों की जांच की। सभी एजेंसी संचालकों को निर्देश दिए गए कि वह व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति न करें और घरेलू सिलिंडर की आपूर्ति बुकिंग होने के बाद भी उपभोक्ता को दें।
लकड़ी की बिक्री 40 से 50 प्रतिशत बढ़ी
व्यावसायिक सिलिंडर बंद होने से कारोबारियों ने अन्य विकल्प चुन लिए हैं। इनमें सबसे प्रमुख जलाने वाली लकड़ी है, जिसकी बिक्री में 40 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। शहर में प्रतिदिन लगभग ढाई से तीन हजार क्विंटल जलाने की लकड़ी बिकने का अनुमान है, जबकि फर्नीचर में काम नहीं आने वाली लकड़ी की कीमत भी आठ सौ से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।
कोयले की मांग में 300 प्रतिशत की वृद्धि
शहर के खाद्य उद्योगों में कोयले की मांग करीब 300 प्रतिशत बढ़ गई है। होटल व ढाबों में प्रतिदिन 800 से एक हजार क्विंटल कोयले की खपत हो रही है, जबकि पहले करीब 200 क्विंटल ही कोयले की खपत होती थी। स्टीम कोयले की कीमतें में 1200 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 1800 से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। वहीं चारकोल की कीमतें साढ़े तीन हजार रुपये प्रति क्विंटल से अधिक हो गई है।
कोयले की तरफ रुख, मेन्यू में 60 प्रतिशत कमी
एमपीनगर, न्यूमार्केट सहित अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में रेस्टोरेंट, होटल और स्ट्रीट फूड बेचने वालों ने एलपीजी सिलिंडर की जगह कोयले से चलने वाले स्टोव का उपयोग करना शुरू कर दिया है। बड़े होटलों ने भी अपने मेन्यू में लगभग 60 प्रतिशत की कमी कर दी है, और सिर्फ उन व्यंजन पर ध्यान दे रहे हैं जिन्हें इंडक्शन कुकटॉप का उपयोग कर बनाया सकता है।
इनका कहना है
शहर में घरेलू गैस सिलिंडरों की बुकिंग के अनुसार आपूर्ति करने के निर्देश सभी एजेंसी संचालकों को दिए गए हैं। घरेलू सिलिंडरों का व्यावसायिक उपयोग रोकने दल का गठन किया गया है जो कि नियमित रूप से एजेंसी व गोदामों का निरीक्षण कर रहा है। एलपीजी गैस की कोई दिक्कत नहीं हैं- कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर।




