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विशेष रिपोर्ट: ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ – कैसे ईरान ने दुनिया के ‘अजेय’ एयर डिफेंस को किया ध्वस्त?

तेहरान: पश्चिम एशिया के आसमान में इस वक्त जो हो रहा है, उसने युद्ध के पुराने सिद्धांतों को बदल कर रख दिया है। जहाँ इजराइल और अमेरिका अपने ‘आयरन डोम’, ‘एरो’ और ‘पैट्रियट’ जैसे सिस्टम्स पर गर्व करते थे, वहीं ईरान ने अपनी ‘सिलिकॉन शील्ड’ और ‘डांसिंग मिसाइल्स’ के जरिए यह साबित कर दिया कि तकनीक से बड़ा ‘दिमाग’ होता है।

1. ‘सेज्जिल’ (Sejjil): वो मिसाइल जो रडार को नाचने पर मजबूर कर दे

ईरान ने इस युद्ध में अपनी सबसे आधुनिक मिसाइल ‘सेज्जिल’ का इस्तेमाल किया है। इसे विशेषज्ञों ने “डांसिंग मिसाइल” का नाम दिया है।

  • कमाल की तकनीक: यह मिसाइल हवा में अपना रास्ता इतनी तेजी और अनिश्चितता से बदलती है कि इजराइल के ‘एरो-3’ और ‘डेविड स्लिंग’ जैसे सिस्टम्स के कंप्यूटर इसकी सटीक लोकेशन का अंदाजा ही नहीं लगा पाते। जब तक रडार इसे ट्रैक करता है, यह अपने लक्ष्य को तबाह कर चुकी होती है।

2. ‘फत्ताह-2’ (Fattah-2): हाइपरसोनिक रफ्तार का खौफ

ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइल फत्ताह-2 ने इजराइल के ‘मल्टी-लेयर्ड’ डिफेंस को पूरी तरह ‘ओवरलोड’ कर दिया।

  • स्पीड और पैंतरेबाजी: Mach 15 की रफ्तार से आने वाली यह मिसाइल न केवल तेज है, बल्कि हवा में गोते (Maneuver) भी लगा सकती है। किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इतनी तेज और दिशा बदलने वाली वस्तु को पकड़ना नामुमकिन साबित हो रहा है।


3. ‘स्वार्म इंटेलिजेंस’ (Swarm Intelligence): रडार को किया ‘अंधा’

ईरान ने “सैचुरेशन अटैक” की रणनीति अपनाई। एक साथ सैकड़ों सस्ते ‘शाहिद’ ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं।

  • रणनीति: इजराइल के महंगे इंटरसेप्टर मिसाइल (जिनकी कीमत करोड़ों में है) इन सस्ते ड्रोन्स को गिराने में खत्म हो गए। जब डिफेंस सिस्टम ‘रीलोड’ हो रहा था, तभी ईरान की मुख्य मिसाइलों ने तेल अवीव के रणनीतिक ठिकानों पर प्रहार किया।

4. ‘मोज़ेक डिफेंस’: सिस्टम का कोई ‘ऑफ-स्विच’ नहीं

ईरान ने अपने कमांड सेंटर तबाह होने के बाद ‘मोज़ेक डिफेंस’ (Mosaic Defense) प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिया। इसके तहत हर प्रांत के कमांडर के पास खुद हमले का फैसला लेने की ताकत है।

  • नतीजा: इजराइल और अमेरिका ने तेहरान के मुख्य रडार भले ही निशाना बनाए हों, लेकिन पूरे ईरान में फैले मोबाइल लॉन्चर्स और विकेंद्रीकृत (Decentralized) इकाइयों ने हमला जारी रखा।


ईरान की सफलता के 3 बड़े ‘फैक्ट्स’

तकनीक असर परिणाम
हाइपरसोनिक ग्लाइड रडार की पकड़ से बाहर सटीक मार
सॉलिड प्रोपेलेंट महज कुछ मिनटों में लॉन्च ‘प्री-एम्प्टिव’ स्ट्राइक नामुमकिन
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर इजराइली रडार में ‘जैमिंग’ सुरक्षा कवच में छेद

निष्कर्ष: बदल गया युद्ध का भूगोल

ईरान ने दुनिया को दिखा दिया कि अरबों डॉलर के एयर डिफेंस सिस्टम भी तब नाकाम हो जाते हैं जब उनके सामने ‘क्वांटिटी’ (संख्या) और ‘स्मार्ट टेक्नोलॉजी’ का मिश्रण पेश किया जाए। आज तेहरान के आसमान में भले ही धुंआ हो, लेकिन इजराइल के ‘अजेय’ कवच में पड़े छेद पूरी दुनिया की रक्षा नीतियों को फिर से लिखने पर मजबूर कर रहे हैं।

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