मध्य प्रदेश कांग्रेस को फिर एक बार झटका लगा, जहां आर्थिक भ्रष्टाचार के 25 साल पुराने मामले में तीन साल की सजा पाने वाले दतिया विधानसभा से पूर्व विधायक …और पढ़ें

कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक राजेंद्र भारती (फाइल फोटो)
HighLights
- मध्य प्रदेश कांग्रेस को फिर एक बार झटका लगा है
- पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को नहीं मिली राहत
- अब सुनवाई 29 जुलाई को नियत की गई है
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस को फिर एक बार झटका लगा। आर्थिक भ्रष्टाचार के 25 साल पुराने मामले में तीन साल की सजा पाने वाले दतिया विधानसभा से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली। आर्थिक अनियमितता से जुड़े मामले में अब सुनवाई 29 जुलाई को नियत की गई है। इसके पहले राज्य सभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होंगे। इसमें भाजपा और एक कांग्रेस की सीट शामिल है।
कांग्रेस के दो वोट हुए कम
कांग्रेस पक्ष के दो वोट कम हो चुके हैं, जिसमें श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोट करने पर रोक है तो दतिया जिले के दतिया से विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त की जा चुकी है। अब दतिया में उपचुनाव की संभावनाएं बढ़ रही हैं। प्रदेश से राज्य सभा की तीन सीटें दिग्विजय सिंह, सुमेर सिंह सोलंकी और जार्ज कुरियन का नौ जून को कार्यकाल समाप्त होने से रिक्त हो रही हैं। 230 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट राजेंद्र भारती की रिक्त है तो 164 विधायक भाजपा, 64 कांग्रेस और एक भारत आदिवासी पार्टी के हैं।
दो सीटें जीतने की स्थिति में भाजपा
एक सीट जीतने के लिए 58 मत प्राथमिकता वाले होने चाहिए। इस हिसाब से भाजपा दो सीटें जीतने की स्थिति में है तो कांग्रेस को एक मिलेगी। हालांकि, इसके दो वोट कम हो चुके हैं। बीना से पार्टी विधायक निर्मला सप्रे के विरुद्ध दलबदल का मामला चल रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाई कोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की है तो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सुनवाई कर चुके हैं।
वहीं, सप्रे साफ कर चुकी हैं कि वे कांग्रेस में ही हैं। पार्टी की ओर से उन्हें सोमवार को विधानसभा के एक दिनी विशेष सत्र में मतदान की स्थिति को देखते हुए व्हिप भी जारी किया गया था। इससे सप्रे का पक्ष मजबूत नजर आता है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें व्हिप इसलिए जारी किया गया था ताकि मतदान की सूरत में वे यदि भाजपा के पक्ष में मतदान करतीं तो दलबदल के आरोप पुष्ट हो जाते मगर ऐसी नौबत ही नहीं आई।




