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गेहूं पर बोनस समेत 2625 का दाम, अब तौल के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार

 

मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश में गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए स्वयं मैदानी मोर्चे पर उतरेंगे। आने वाले दिनों में मुख्यम …और पढ़ें

 

एमपी के किसानों के लिए बड़ी सौगात: गेहूं पर बोनस समेत 2625 का दाम, अब तौल के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार

मुख्यमंत्री मोहन यादव गेहूं खरीदी केंद्रों का करेंगे औचक दौरा

 

भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश में गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए स्वयं मैदानी मोर्चे पर उतरेंगे। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री विभिन्न उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और वहां उपस्थित किसानों से सीधा संवाद कर व्यवस्थाओं का फीडबैक लेंगे। मुख्यमंत्री का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन द्वारा निर्देशित सभी सुविधाएं किसानों को जमीनी स्तर पर मिल रही हैं या नहीं।

तौल और स्लॉट बुकिंग की क्षमता में भारी बढ़ोतरी

किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर न्यूनतम 6 कर दी है, जिसे जिला स्तर पर और भी बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही, उपार्जन केंद्रों की प्रतिदिन की स्लॉट बुकिंग क्षमता को 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दिया गया है। विशेष परिस्थितियों में जिले इसे 3000 क्विंटल तक विस्तारित कर सकेंगे। साथ ही, अब किसान जिले के किसी भी केंद्र पर अपनी उपज बेच सकेंगे और यह प्रक्रिया प्रत्येक शनिवार को भी जारी रहेगी।

 

बोनस के साथ 2625 रुपये का समर्थन मूल्य

प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। इस बार गेहूं का उपार्जन 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर किया जा रहा है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त बोनस राशि भी शामिल है। इस प्रकार किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। उपार्जन केंद्रों पर बारदाने, सिलाई मशीन, कंप्यूटर और नेट कनेक्शन जैसी तमाम आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं भी दुरुस्त की गई हैं।

गुणवत्ता मानकों (FAQ) में दी गई बड़ी ढील

खराब मौसम या अन्य कारणों से प्रभावित फसलों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गेहूं की गुणवत्ता के कड़े मापदंडों में शिथिलता प्रदान की है। अब चमक विहीन गेहूं की स्वीकार्य सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह, सुकड़े दानों की सीमा 6 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा को 6 प्रतिशत तक किया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसान अपनी फसल का उचित दाम पा सकें।

केंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

किसानों की सहूलियत के लिए उपार्जन केंद्रों पर पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान और जन सुविधाओं की पुख्ता व्यवस्था की गई है। केंद्रों पर उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। जनसंपर्क विभाग द्वारा केंद्रों पर पोस्टर और बैनर भी लगाए गए हैं ताकि किसान सरकार द्वारा उनके हित में चलाई जा रही योजनाओं और दी जा रही सुविधाओं के प्रति जागरूक हो सकें।

 

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