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आम से लेकर केला और मिर्च तक, MP में होगा ‘महोत्सवों’ का साल, किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की तैयारी

 

मध्य प्रदेश के सीएम डा. मोहन यादव ने उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने पर बल देते हुए इन्हें छोटी जगह से बड़ी कमाई करने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने …और पढ़ें

आम से लेकर केला और मिर्च तक, MP में होगा 'महोत्सवों' का साल, किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की तैयारी

CM मोहन यादव ने उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने पर बल दिया (AI जनरेट इमेज)

HighLights

  1. MP में जून में होगा आम महोत्सव
  2. जुलाई में मिर्च और सितंबर में केला महोत्सव
  3. एमपी में बागवानी फसलों का बढ़ेगा रकबा

भोपाल। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने पर बल देते हुए इन्हें छोटी जगह से बड़ी कमाई करने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को इससे जोड़ा जाना चाहिए। किसानों की वास्तविक आय बढ़ाने के लिए उनको सीजनल और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के लिए प्राकृतिक खाद का उपयोग कर जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित करना बहुत आवश्यक है। यह बात मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की समीक्षा के दौरान कही।

किस महीने कौन सा महोत्सव होगा?

इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि इसी वर्ष जून में भोपाल में आम महोत्सव, जुलाई में खरगोन में मिर्च महोत्सव, सितंबर में बुरहानपुर में केला महोत्सव, अक्टूबर में इंदौर में सब्जी महोत्सव और नवंबर में ग्वालियर में अमरूद महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संतरा महोत्सव का आयोजन करने के भी निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ किसानों को फल, फूल, सब्जी, मसाला, औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। योजनाबद्ध तरीके से उद्यानिकी फसलों और इनके जोत रकबे का साल-दर-साल विस्तार किया जाए।

 

मसाला फसलों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ रही- CM मोहन यादव

उन्होंने कहा कि हमारी उद्यानिकी एवं मसाला फसलों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। इसकी पूर्ति के लिए बाजार तलाशें, उद्यानिकी उत्पादों की भरपूर ब्रांडिग करें। हमारे यहां औषधीय गुणों से भरपूर फसलों की खेती भी बहुतायत में की जाती है। औषधि निर्माण के लिए जरूरी इन फसलों की इंटरनेशनल मार्केट में मांग अनुसार आपूर्ति के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार करें। प्रदेश में हर साल नए-नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल खोले जा रहे हैं। इनमें देसी-आयुर्वेदिक दवाइयों की आपूर्ति में प्रदेश की औषधीय फसलों एवं उप-उत्पादों का भरपूर उपयोग किया जाए।

फूलों की खेती को प्रोत्साहन बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर उज्जैन में सेंटर फार एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना कर फूलों की खेती को प्रोत्साहित व विस्तार किया जा रहा है। सेंटर स्थापना के लिए उज्जैन शहर के पास एक गांव में 19 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर समुचित समन्वय भी किया जा रहा है। बताया गया कि बागवानी फसलों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में हार्टिकल्चर प्रमोशन एजेंसी की स्थापना करने की कार्रवाई जारी है।

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