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MP में अफसरों के लिए बदलेंगे गिफ्ट के नियम, अब एक महीने की सैलरी से ज्यादा महंगा उपहार लिया तो खैर नहीं

 

मध्य प्रदेश सरकार सिविल सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों के आचरण नियम नए सिरे से निर्धारित कर रही है। इसके तहत अब कोई भी अधिकारी अपने मूल वेतन से अधिक र …और पढ़ें

 

MP में अफसरों के लिए बदलेंगे गिफ्ट के नियम, अब एक महीने की सैलरी से ज्यादा महंगा उपहार लिया तो खैर नहीं

मध्य प्रदेश में अधिकारियों के मूल वेतन के आधार पर तय होगी उपहार की राशि सीमा

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में अधिकारियों के मूल वेतन के आधार पर तय होगी उपहार की राशि सीमा
  2. सामान्य प्रशासन विभाग के प्रस्ताव पर मुख्य सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की बैठक
  3. छह माह के वेतन से अधिक निवेश किया तो अग्रिम सूचना देना अनिवार्य है

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार सिविल सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों के आचरण नियम नए सिरे से निर्धारित कर रही है। इसमें यह प्रविधान किया जा रहा है कि कोई भी अधिकारी अपने मूल वेतन से अधिक राशि का उपहार एक बार में नहीं ले सकेगा। इसका मतलब यह भी नहीं है कि वह बार-बार कार्यक्रम आयोजित कर उपहार ले सकेगा।

इसके लिए अधिकतम सीमा निर्धारित होगी। वहीं, छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि का निवेश करने पर अपने प्रशासकीय विभाग को सूचना देनी होगी। इस तरह के अन्य प्रविधान भी प्रस्तावित किए गए हैं।

मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में प्रस्ताव को अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के समक्ष रखने के निर्देश दिए गए। मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम वर्ष 1965 में बने थे और इनमें आखिरी बार वर्ष 2000 में संशोधन किया गया था। अब नए संशोधन की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है।

 

वर्तमान नियम में कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी विवाह, वर्षगांठ, अंत्येष्टि या धार्मिक समारोह जैसे अवसरों पर 1,500 रुपये से अधिक का नकद उपहार स्वीकार नहीं कर सकता, लेकिन वर्तमान दौर में इसे अव्यावहारिक माना गया। वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों की समिति ने केंद्र सरकार के प्रविधान का अध्ययन किया और यह प्रस्ताव दिया गया कि कर्मचारियों को एक बार में अपने एक माह के मूल वेतन के बराबर नकद उपहार लेने की अनुमति दी जा सकती है।

हालांकि, इसे भी दो माह के मूल वेतन के बराबर करने का सुझाव दिया गया है। सीमा से अधिक राशि के उपहार, भूमि, वाहन या अन्य मूल्यवान उपहारों की जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग को देना अनिवार्य रहेगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बैठक में संशोधित नियम के सभी पहलुओं पर विचार हो चुका है। अंतिम निर्णय के लिए इसे कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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