सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि इसी वर्ष 19 जनवरी को अभियोजन की स्वीकृति पर उचित निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार को जो निर्देश दिए गए थे …और पढ़ें

कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी मामले में SC सख्त।
HighLights
- कर्नल सोफिया कुरैशी टिप्पणी मामले में SC सख्त
- SIT की रिपोर्ट के बाद अब अभियोजन की बारी
- सरकार को अभियोजन पर अब लेना होगा फैसला
भोपाल। सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के विरुद्ध अशालीन टिप्पणी के मामले में जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह की मुश्किल बढ़ना तय है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि इसी वर्ष 19 जनवरी को अभियोजन की स्वीकृति पर उचित निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार को जो निर्देश दिए गए थे, उसका पालन किया जाए यानी अब सरकार को अभियोजन पर स्वीकृति देने या न देने पर निर्णय लेना ही होगा।
विशेष जांच दल (एसआइटी) ने पूरे मामले की जांच कर अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी इसलिए मामला गृह विभाग के माध्यम से सामान्य प्रशासन विभाग के भारसाधक मंत्री यानी मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के पास अनुमोदन के लिए जाएगा। बता दें, विजय शाह ने आंबेडकर नगर (महू) के रायकुंडा गांव में 12 मई, 2025 को एक कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अशालीन टिप्पणी की थी।
हाई कोर्ट का संज्ञान और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश
हाई कोर्ट जबलपुर ने स्वत: संज्ञान लेकर इसे सेना व महिला अधिकारी का अपमान बताया और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। 14 मई, 2025 को विजय शाह के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 यानी देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना, धारा 196(1)(ब)- सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाले कार्य और धारा 197(1)(स)- राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल आचरण के तहत केस दर्ज किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की राहत और एसआइटी का गठन
इसे विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। यहां से 19 मई, 2025 को फौरी राहत यह मिली कि गिरफ्तारी पर रोक लगा दी लेकिन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित करने के निर्देश दिए। 19 अगस्त, 2025 को एसआइटी ने जांच करके रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंप दी, जिसमें अभियोजन की स्वीकृति की बात कही गई लेकिन राज्य सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया था। गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है। इसे आगामी कार्रवाई के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा जाएगा। विधि एवं विधायी विभाग से अभिमत भी लिया जा सकता है क्योंकि निर्देश उचित निर्णय लेने के हैं।
कानूनी विशेषज्ञों की राय और आगे की संभावना
पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय मिश्रा का कहना है कि अभियोजन की स्वीकृति देने या न देने के संबंध में निर्णय राज्य सरकार को लेना है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद नहीं लगता है कि सरकार इसे अधिक समय तक लंबित रखेगी। चूंकि, मामला मंत्री से जुड़ा है इसलिए इस पर निर्णय मुख्यमंत्री के स्तर से होगा।
अभियोजन की स्वीकृति मिलने के बाद न्यायालय में केस चलेगा। जहां तक मंत्री पद से हटाने या त्यागपत्र देने की बात है तो यह पूरा मामला नैतिकता का है और सरकार के विवेक पर निर्भर करेगा कि वह क्या कदम उठाती है। इसके लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।




