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गिरोह का सरगना भोपाल से गिरफ्तार, प्रदेश में हो सकते हैं 50 से अधिक फर्जी डॉक्टर

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के सहारे नौकरी करने वाले तीन डाक्टरों की गिरफ्तारी के बाद अब दमोह …और पढ़ें

MP में फर्जी MBBS डिग्री मामला: गिरोह का सरगना भोपाल से गिरफ्तार, प्रदेश में हो सकते हैं 50 से अधिक फर्जी डॉक्टर

फर्जी एमबीबीएस डॉक्टरों के बड़े रैकेट का भंडाफोड़। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. फर्जी एमबीबीएस डॉक्टरों के बड़े रैकेट का भंडाफोड़
  2. पुलिस ने भोपाल से दबोचा मुख्य सरगना हीरा सिंह
  3. सरकारी ‘संजीवनी क्लीनिकों’ में कर रहे थे नौकरी

दमोह। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के सहारे नौकरी करने वाले तीन डाक्टरों की गिरफ्तारी के बाद अब दमोह पुलिस ने गिरोह के सरगना को भोपाल से गिरफ्तार किया है। पुलिस लगातार भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, धार, मंडला, जबलपुर समेत अन्य जिलों में दबिश दे रही है।

अभी तक दमोह, जबलपुर और भोपाल से चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। तीन फर्जी डाक्टरों को बुधवार को दमोह के न्यायालय में पेश किया गया, जहां से दो दिनों की पुलिस रिमांड मिली है। प्रदेश में 50 से अधिक फर्जी डाक्टर होने की आशंका जताई जा रही है।

 

कोहैफिजा भोपाल से दबोचा गया सरगना

दमोह पुलिस ने फर्जी डिग्री मामले के सरगना हीरा सिंह कौशल (45) पुत्र राम प्रकाश कौशल को कोहैफिजा हाउसिंग बोर्ड कालोनी भोपाल से गिरफ्तार किया है। वही इस नेटवर्क का संचालन करता था। हीरा के संपर्क में सबसे पहले ग्वालियर व भोपाल निवासी डाक्टर आए थे, जिनके माध्यम से एमबीबीएस की फर्जी डिग्री बनाने का क्रम शुरू हुआ।

सबसे पहले मुरैना निवासी अजय मौर्य की डिग्री बनाई गई थी। इसके बाद मौर्य के संपर्क में आए ग्वालियर निवासी कुमार सचिन यादव और सीहोर निवासी राजपाल गौर ने इसी गिरोह के माध्यम से फर्जी डिग्री तैयार कराई।

रीवा और ग्वालियर कालेजों की फर्जी डिग्री तैयार की

जालसाजों ने रीवा मेडिकल कालेज और जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के नाम की फर्जी डिग्रियां तैयार की हैं। वहीं एमपी मेडिकल काउंसिल भोपाल के रजिस्ट्रार ने राजपाल गौर का रजिस्ट्रेशन फर्जी पाया है। 2018 के पंजीयन क्रमांक एमपी 21961 को कूटरचित कर 2023 बनाया गया था।

असल में यह नंबर डॉ. अभिषेक यादव के नाम से पंजीकृत है, जो नर्मदापुरम के सिवनीमालवा में पदस्थ हैं। डॉ. यादव ने बताया कि रजिस्ट्रेशन एमसीआइ के पोर्टल पर ओटीपी के बिना नहीं खुलता, फिर भी मेरा रजिस्ट्रेशन नंबर कैसे इस्तेमाल हो सकता है।

कई जिलों में दी जा रही दबिश

एसपी आनंद कलादगी ने बताया कि अन्य फर्जी डाक्टरों व गिरोह के सदस्यों की तलाश के लिए टीमें लगातार सक्रिय हैं। पूरे गिरोह को उजागर करने के प्रयास किया जा रहा है।

 

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