भोपाल। मॉडल और एक्ट्रेस त्विशा शर्मा मौत मामले में न्यायिक हिरासत में भेजी गईं पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह का न्यायिक कार्यकाल एक बार फिर चर्चा में है। अदालत में विशेष सुरक्षा और अलग सेल की मांग के दौरान उनके लंबे और सख्त न्यायिक रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया।
अदालती अभिलेखों और उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड के अनुसार, गिरिबाला सिंह ने भोपाल जिला न्यायालय में विभिन्न पदों पर रहते हुए कई महत्वपूर्ण आपराधिक मामलों में फैसले सुनाए और दर्जनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
9 महीने रहीं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश
गिरिबाला सिंह करीब 19 महीने तक भोपाल की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहीं और फरवरी 2023 में इसी पद से सेवानिवृत्त हुईं।
इस अवधि में उनके समक्ष 1,129 मामले आए। इनमें से 56 सेशन ट्रायल मामलों में निर्णय सुनाते हुए उन्होंने 27 आरोपियों को दोषी ठहराया। इनमें 12 हत्या के आरोपी भी शामिल थे, जिन्हें अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में भी सुनाए कई अहम फैसले
प्रधान जिला न्यायाधीश बनने से पहले गिरिबाला सिंह सितंबर 2015 से नवंबर 2017 तक भोपाल में अपर सत्र न्यायाधीश के पद पर पदस्थ रहीं।
करीब 27 महीने के इस कार्यकाल में उन्होंने 31 आपराधिक मामलों का निपटारा किया। इनमें 12 मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया, जबकि एक हत्या के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
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पॉक्सो मामलों में भी अपनाया सख्त रुख
गिरिबाला सिंह ने पॉक्सो (POCSO) अधिनियम से जुड़े मामलों में भी सख्त रुख अपनाया। अपर सत्र न्यायाधीश के रूप में उन्होंने 22 पॉक्सो मामलों का निर्णय किया, जिनमें 10 आरोपियों को दोषी ठहराकर जेल भेजा गया।
सुरक्षा मांग के पीछे दिया गया यही तर्क
सूत्रों के अनुसार, जेल में विशेष सुरक्षा और अलग बैरक की मांग करते समय गिरिबाला सिंह की ओर से उनके इसी न्यायिक रिकॉर्ड का हवाला दिया गया। तर्क दिया गया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने हत्या, गंभीर अपराध और पॉक्सो मामलों में कई दोषसिद्धियां की हैं, इसलिए सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है।
अदालत ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।




