भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों के लिए अलग जल नीति तैयार करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि भविष्य में भूमिगत जल पर निर्भरता कम कर सतही जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां बोरवेल आधारित जलापूर्ति की जा रही है, वहां जल स्रोत के पांच किलोमीटर दायरे में नई बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही सूख चुके पेयजल स्रोतों की जांच कर उनके पुनर्जीवन की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए।
जल निगम संभालेगा सीवरेज का काम
बैठक में सीवरेज प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। नई व्यवस्था के तहत जल निगम को सीवरेज परियोजनाओं की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। मुख्यमंत्री ने विभागीय ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सिविल विंग, मैकेनिकल विंग और जल निगम के बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि प्रदेश पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में आगे बढ़ा है, लेकिन सीवरेज व्यवस्था अभी भी पिछड़ी हुई है, जिस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
2028 से पहले हर घर तक पहुंचेगा नल का जल
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने बताया कि मार्च 2028 से पहले प्रदेश के हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। वर्तमान में जल जीवन मिशन का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
प्रदेश में अब तक:
– 16.50 लाख से अधिक सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन दिए गए
– 15,238 नए नलकूप और हैंडपंप स्थापित किए गए
– 14,200 गांवों को “हर घर जल” घोषित किया गया
– 1.11 करोड़ से अधिक परिवारों तक नल से जल पहुंचाया गया
– लगभग 75 प्रतिशत परिवार नल जल योजना से जुड़ चुके हैं
केंद्र से मिलने वाले 5 हजार करोड़ रुपये पर फोकस
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाली करीब 5,000 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त करने के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के साथ लगातार समन्वय बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि जलापूर्ति के लिए केवल ट्यूबवेल पर निर्भर रहने के बजाय तालाब, सरोवर और अन्य सतही जल स्रोतों का विकास किया जाए। इससे जल संरक्षण के साथ भूजल स्तर में भी सुधार होगा।
इंदौर की घटना से सीख लेने के निर्देश
बैठक में जब विभागीय उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण किया गया तो मुख्यमंत्री ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र की हालिया घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं भविष्य के लिए चेतावनी हैं और जल प्रबंधन को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है।
मध्य प्रदेश बना मिसाल
बैठक में बताया गया कि खुले बोरवेल में गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए कानून बनाने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है। सरकार अब जल सुरक्षा और जल प्रबंधन को लेकर दीर्घकालिक नीति पर काम कर रही है।




