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भोपाल में 70 फीसदी बसों और टैक्सियों में पैनिक बटन बंद, फिटनेस सर्टिफिकेट मिलते ही निकाल देते हैं वीएलटी डिवाइस

 

भोपाल। भोपाल की सड़कों पर सफर करने वाले यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए अनिवार्य किया गया पैनिक बटन और वीएलटी (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग) डिवाइस एक बड़ा धोखा साबित हो रहा है। शहर में दौड़ रहीं लगभग 70 प्रतिशत सिटी व निजी बसों, टैक्सियों और नेशनल परमिट वाले ट्रकों में या तो पैनिक बटन बंद हैं या फिर उनमें वीएलटी डिवाइस लगाई ही नहीं गई है।

सरकारी नियमों (एआईएस-140) का यह खुला उल्लंघन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के सुरक्षा दावों की पोल खोल रहा है। पड़ताल में सामने आया है कि एक जनवरी 2019 के बाद पंजीकृत हुए 12 हजार से अधिक व्यावसायिक वाहनों में से आठ हजार से ज्यादा में यह सुरक्षा तंत्र पूरी तरह ठप है।

वाहन मालिक केवल आरटीओ से फिटनेस सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए गाड़ी में वीएलटी डिवाइस लगवाते हैं और जैसे ही काम पूरा होता है, उसे निकालकर घरों में बंद कर देते हैं। कुछ वाहन चालकों का तर्क है कि डिवाइस रास्ते में गिरकर खराब न हो जाए, इसलिए वे इसे हटा देते हैं। कई वाहन मालिकों ने तो इसे कचरा और पैसे की बर्बादी तक करार दिया है।

रिचार्ज और सिम रिनुअल का पेंच

एक आरटीओ कर्मचारी ने नाम ने प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि इस लापरवाही की मुख्य वजह हर साल होने वाला खर्च है। नियमों के मुताबिक, ट्रैकिंग डिवाइस में 365 दिन की वैलिडिटी वाली सिम का होना अनिवार्य है। जनवरी 2018 के बाद रजिस्टर्ड गाड़ियों में सिम की वैलिडिटी दो साल की होती है, जबकि 2017 से पहले की गाड़ियों में इसे हर साल रिन्यू कराना पड़ता है। वाहन मालिकों का कहना है कि हर साल सिम रिचार्ज कराना बेहद महंगा पड़ता है, इसलिए वे इस झंझट से दूर रहते हैं।

आपातकाल में नहीं मिलेगी कोई मदद

वाहन मालिकों की मनमानी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ सकता है। वीएलटी डिवाइस बंद होने या गाड़ी में न होने के कारण यदि सफर के दौरान कोई आपात स्थिति बनती है और यात्री पैनिक बटन दबाता भी है तो आरटीओ के कंट्रोल कमांड सेंटर को वाहन की लाइव लोकेशन नहीं मिल पाएगी।

ऐसे में मुसीबत में पीड़ितों तक पुलिस या प्रशासनिक मदद समय पर पहुंचना नामुमकिन हो जाएगा। विभाग की इस सुस्त निगरानी के चलते अब यह पूरी व्यवस्था सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है।

इसलिए जरूरी है गाड़ियों में वीएलटी डिवाइस और पैनिक बटन

सार्वजनिक वाहनों में यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए वीएलटी (वीकल लोकशन ट्रैकिंग) डिवाइस और पैनिक बटन अनिवार्य किए गए हैं। वीएलटी डिवाइस एक एडवांस जीपीएस की तरह काम करता है, जो गाड़ी की पल-पल की सटीक लोकेशन, स्पीड और रूट की लाइव जानकारी सीधे पुलिस और परिवहन विभाग के मुख्य कंट्रोल रूम को भेजता है।

वहीं, किसी भी खतरे या आपात स्थिति में यात्री द्वारा पैनिक बटन दबाते ही बिना कोई शोर किए कंट्रोल रूम में इमरजेंसी अलर्ट पहुंच जाता है। अलर्ट मिलते ही वीएलटी सक्रिय होकर लाइव लोकेशन दिखाता है, जिससे पुलिस तुरंत नजदीकी पीसीआर वैन को भेजकर मौके पर मदद पहुंचा सकती है।

वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है

अगर वाहनों में वीएलटी डिवाइस बंद पाई जाती है तो उस वाहन मलिकों पर कार्रवाई की जाती है। वाहन का फिटनेस रद्द किया जाता है। साथ ही नए सिरे से फिटनेस बनाया जाता है। विभाग द्वारा ऐसे वाहनों पर लगातार कार्रवाई भी की जा रही है। – जितेंद्र शर्मा, आरटीओ भोपाल।

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