शेयर बाजार में आईपीओ में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने गेल इंडिया लिमिटेड के एक सेवानिवृत्त अधिकारी से 28.84 लाख रुपये की ठगी की है। …और पढ़ें

गेल के रिटायर्ड अधिकारी से 28.14 लाख की साइबर ठगी।
HighLights
- साइबर अपराधियों के झांसे में आए गेल के पूर्व अधिकारी
- गोल्डलाइन फार्मा-सिमका IPO के नाम पर ऐंठी रकम
- फर्जी ऐश्वर्या पटेल ने रिटायरमेंट पूंजी पर डाला डाका
भोपाल। शेयर बाजार में आईपीओ में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने गेल इंडिया लिमिटेड के एक सेवानिवृत्त अधिकारी से 28.84 लाख रुपये की ठगी की है। पूर्व अधिकारी एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ठगों के संपर्क में आए। शातिर जालसाजों ने एक फर्जी ऐप पर उन्हें आईपीओ दिलवाए और फिर ट्रेडिंग में भारी मुनाफा दिखाकर अलग-अलग किस्तों में रकम ऐंठ ली।
वहीं जब पूर्व अधिकारी ने उस राशि को निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने अलग-अलग टैक्स की मांग की, लेकिन फिर भी रकम नहीं लौटाई, जिसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ। मिसरोद थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार स्नेहा नगर, मिसरोद निवासी प्रेमलाल राधेलाल कापसे गेल इंडिया लिमिटेड से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद प्राप्त राशि को निवेश करने की योजना बनाई थी। इसी दौरान साइबर ठगों ने उन्हें अपने जाल में फंसा लिया।
अमानसा इन्वेस्टमेंट ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट
ग्रुप के सदस्यों ने दावा किया था भारी मुनाफा; शिकायत में बताया गया कि 28 अप्रैल को उन्हें अचानक ‘अमानसा इन्वेस्टमेंट लिमिटेड’ नामक एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। ग्रुप में कई सदस्य निवेश से भारी मुनाफा होने के दावे और स्क्रीनशॉट साझा कर रहे थे। इसी दौरान ऐश्वर्या पटेल नाम की प्रोफाइल से संपर्क कर उन्हें विभिन्न आईपीओ में निवेश करने की सलाह दी गई। आरोपियों ने एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर उनका खाता खुलवाया।
फर्जी आईपीओ में निवेश और रकम निकासी के दौरान खुलासा
रकम निकालने के दौरान हुआ ठगी का खुलासा; इसके बाद पीड़ित ने ठगों के बताए अनुसार आईपीओ में निवेश के लिए कई किस्तों में कुल 28.14 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। उनसे गोल्डलाइन फार्मा, सिमका और किश्त (किस्श्ट) आईपीओ में निवेश के नाम पर रकम जमा कराई गई। निवेश के बाद फर्जी ऐप पर उनके ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट में लगातार बढ़ता हुआ लाभ दिखाया जाता रहा।
जब पीड़ित ने अपनी मूल राशि और मुनाफा निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने भुगतान रोक दिया। उन्हें बताया गया कि पूरी रकम निकालने के लिए पहले लाभ की रकम का 20 प्रतिशत टैक्स या सर्विस चार्ज के रूप में जमा करना होगा। अतिरिक्त रकम की मांग पर पीड़ित को ठगी की आशंका हुई और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।




