एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
एनजीटी की सख्ती: भोपाल में प्लास्टिक इकाइयों और प्रदूषण के मामले में जवाब न देने वाले विभागों को 3 हफ्ते का अल्टीमेटम; 11 सितंबर को अगली सुनवाई
भोपाल: राजधानी भोपाल में प्लास्टिक इकाइयों के संचालन और प्लास्टिक कचरे के कारण पर्यावरण व जनस्वास्थ्य पर पड़ रहे विपरीत प्रभावों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच द्वारा इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की जा रही है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अधिकरण ने अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं करने वाले संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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एनजीटी का स्वतः संज्ञान: भोपाल में प्लास्टिक फैक्ट्रियों के संचालन, कचरे के अवैज्ञानिक निपटान और उससे आसपास की घनी आबादी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर असर को लेकर एनजीटी खुद इस मामले की सुनवाई कर रहा है।
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तीन हफ्ते का अल्टीमेटम: सुनवाई के दौरान अधिकरण ने स्पष्ट किया कि जिन प्रतिवादियों (विभागों व पक्षों) ने अभी तक जवाब दाखिल नहीं किया है, वे अनिवार्य रूप से तीन सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखें।
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रिजाइंडर के लिए समय: आवेदक पक्ष को जवाब के प्रत्युत्तर में रिजाइंडर दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
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प्रदूषण बोर्डों द्वारा जवाब पेश: मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से अपने-अपनों जवाब पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।
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अगली सुनवाई: इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 11 सितंबर 2026 को तय की गई है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला
इस स्वतः संज्ञान लिए गए मामले में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम, पर्यावरणीय मानकों के कड़ाई से पालन और संबंधित प्रशासनिक विभागों की जवाबदेही जैसे अहम मुद्दे उठाए गए हैं। एनजीटी की इस सख्ती से अब प्लास्टिक इकाइयों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े महकमों पर अपनी रिपोर्ट समय पर पेश करने का दबाव बढ़ गया है।




