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क्षिप्रा नहीं शिप्रा लिखा जाएगा सरकारी दस्तावेजों में नदी का नाम, यजुर्वेद और कालिदास के रेफरेंस से सामने आया सही नाम

 

मध्य प्रदेश सरकार ने अब साफ कर दिया है कि नदी का नाम सरकारी दस्तावेजों में ‘शिप्रा’ ही लिखा जाएगा, ‘क्षिप्रा’ नहीं।

क्षिप्रा नहीं शिप्रा लिखा जाएगा सरकारी दस्तावेजों में नदी का नाम, यजुर्वेद और कालिदास के रेफरेंस से सामने आया सही नाम

शिप्रा नदी पर रामघाट की तस्वीर। – फाइल फोटो

HighLights

  1. सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रेजेंटेशन में ‘क्षिप्रा’ लिखे जाने पर आपत्ति जताई
  2. एआई से पूछा तो उसने भी ‘क्षिप्रा’ बताया और संस्कृत शब्द ‘क्षिप्र’ का हवाला दिया
  3. फिर यजुर्वेद और कालिदास की रचनाओं से रेफरेंस मांगा गया

भोपाल। मध्य प्रदेश में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) की गुरुवार को हुई बैठक के दौरान प्रेजेंटेशन में सीएम डॉ. मोहन यादव ने नदी का नाम क्षिप्रा लिखने पर आपित्त ली। उन्होंने कहा कि नदी का नाम शिप्रा है या क्षिप्रा।

तुरंत वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से भी यह सवाल पूछकर पता लगाने की कोशिश की, लेकिन उसने भी जवाब में नदी का नाम क्षिप्रा ही बताया। इस पर सीएम ने यजुर्वेद के श्लोकों और कालिदास की रचनाओं से रेफरेंस लेने को कहा, जिसमें नदी का नाम शिप्रा लिखा मिला।

 

इस बैठक में यह तय किया गया कि अब से सभी सरकारी दस्तावेजों में नदी का नाम शिप्रा ही लिखा जाएगा। इस दौरान एआई ने अपने पुराने दिए क्षिप्रा जवाब के लिए माफी भी मांगी। इसी के जरिए यजुर्वेद और कालिदास की रचनाओं में शिप्रा नदी को लेकर किए गए वर्णन की जानकारी मांगी गई थी।

एआई ने दिया था यह जवाब

एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) ने पहले पूछे गए सवाल पर संस्कृत शब्द क्षिप्र का हवाला देते हुए नदी का नाम क्षिप्रा बताया। क्षिप्र का अर्थ होता है तेजी से चलने वाला। इस पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नदी की धारा तो तेज नहीं है। उज्जैन में तो यह बहुत ही धीमी गति पर चलती है। केवल बारिश के दिनों में ही नदी बहुत तेज रफ्तार में बहती है।

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