एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल में बड़ी कार्रवाई: रचना नगर स्थित पेट्रोल पंप पर बिक रहा था पानी मिला डीजल, 9,700 लीटर से अधिक ईंधन जब्त
भोपाल : राजधानी भोपाल में उपभोक्ताओं के साथ हो रही धोखाधड़ी और अनियमितताओं के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। कलेक्टर के निर्देश पर गठित विशेष जांच दलों द्वारा शहर के पेट्रोल पंपों की औचक जांच की जा रही है। इसी क्रम में गोविंदपुरा वृत्त की टीम ने बुधवार को रचना नगर के पास स्थित मेसर्स दम्मो फिलिंग स्टेशन पर छापा मारा, जहां ग्राहकों को पानी मिला डीजल बेचे जाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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पानी मिले डीजल का खुलासा: इंडियन ऑयल (IOCL) के इस पेट्रोल पंप पर जांच के दौरान डीजल में पानी मिले होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद टैंक और चार नोजल सील कर दिए गए।
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बड़ी मात्रा में जब्ती: मौके से कुल 9,787 लीटर डीजल जब्त किया गया है, जिसमें करीब 100 लीटर पानी मिला हुआ था।
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प्रशासनिक कार्रवाई: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देशों के तहत भोपाल के 198 पेट्रोल पंपों की जांच के लिए आठ एसडीएम और तहसीलदार के विशेष दलों का गठन किया गया है।
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अन्य अनियमितताएं: पंप पर अधिक भंडारण, इथेनॉल मिश्रण की सूचना चस्पा न करने और वाटर कूलर में भारी गंदगी जैसी गंभीर खामियां भी पाई गईं।
छापेमारी के दौरान सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के आदेश और खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय के निर्देशों पर एडीएम प्रकाश नायक के मार्गदर्शन में जांच दलों का गठन किया गया है। गोविंदपुरा दल (जिसमें सहायक आपूर्ति अधिकारी अशोक सत्यार्थी, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सफदर खान और आईओसीएल के सेल्स अधिकारी तरुण अग्रवाल शामिल रहे) द्वारा की गई जांच में निम्नलिखित खुलासे हुए:
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डीजल में पानी की मिलावट: टैंक के परीक्षण में डीजल में पानी की पुष्टि होने के बाद 9,787 लीटर डीजल जब्त किया गया।
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अवैध भंडारण: पंप के रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि पिछले पांच महीनों (दिसंबर, मार्च, मई, जून और जुलाई) में निर्धारित क्षमता से 3,000 लीटर अधिक पेट्रोल का भंडारण दर्ज किया गया है। नियमों के अनुसार यहां 20 हजार लीटर से अधिक पेट्रोल का भंडारण नहीं किया जा सकता, जबकि रिकॉर्ड में 23 हजार लीटर दर्ज पाया गया।
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नियमों की अनदेखी: सामान्य और एक्स्ट्रा प्रीमियम 95 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल की पुष्टि हुई, लेकिन पंप संचालक द्वारा ग्राहकों की जानकारी के लिए ‘E-20 पेट्रोल’ से संबंधित कोई भी सूचना बोर्ड या पर्ची चस्पा नहीं की गई थी।
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पेयजल में भारी गंदगी: ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराए गए वाटर कूलर में कचरा और गंभीर गंदगी पाई गई, जो जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
अधिकारियों का असहयोग और आगे की कार्रवाई
जांच के दौरान प्रशासनिक टीम को कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, क्षेत्रीय नापतौल निरीक्षक मौके पर उपस्थित नहीं हुए, वहीं मौके पर मौजूद इंडियन ऑयल कंपनी के एरिया सेल्स अधिकारी तरुण अग्रवाल ने भी जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया।
प्रशासन द्वारा इन सभी अनियमितताओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, जिसे विधिवत रूप से जल्द ही कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके आधार पर पंप संचालक के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।




