एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
चीता प्रोजेक्ट के डायरेक्टर उत्तम शर्मा राज्य सूचना आयोग में तलब, RTI नियमों की अनदेखी पर एक्टिविस्ट ने की कार्रवाई की मांग
भोपाल (राज्य ब्यूरो): मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चल रहे बहुचर्चित ‘चीता प्रोजेक्ट’ से जुड़ी जानकारियां छिपाने और सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। राज्य सूचना आयुक्त राजेश भट्ट ने चीता प्रोजेक्ट के डायरेक्टर उत्तम शर्मा को आयोग के समक्ष तलब किया है। यह कार्रवाई प्रसिद्ध आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय दुबे की शिकायत याचिका पर की गई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर तलब: राज्य सूचना आयुक्त ने चार में से तीन प्रकरणों में चीता प्रोजेक्ट के डायरेक्टर उत्तम शर्मा को आयोग के समक्ष हाजिर होने का आदेश दिया है।
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महत्वपूर्ण जानकारियां दबाने का आरोप: आरटीआइ के तहत चीतों के स्वास्थ्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कूनो में निर्माण कार्यों और अस्पताल के संसाधनों से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।
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कानूनी प्रावधानों का हवाला देकर इनकार: प्रोजेक्ट अधिकारियों ने आरटीआइ अधिनियम की धारा 8(1)(ए) और 8(1)(जे) का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया था और कुछ मामलों में अनुचित शुल्क की मांग की थी।
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कड़ी कार्रवाई की मांग: याचिकाकर्ता ने अधिकारी पर खुद ही पीआईओ और प्रथम अपीलीय अधिकारी बनकर गैर-कानूनी आदेश पारित करने का आरोप लगाते हुए जुर्माने और विभागीय जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
एक्टिविस्ट अजय दुबे द्वारा दाखिल की गई याचिका के अनुसार, वर्ष 2024 से लेकर अब तक जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे गए थे, जिनमें निम्नलिखित जानकारियां शामिल थीं:
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वर्ष 2024 में चीतों को बेहोश करने की अनुमति और उनके ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट।
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घायल चीतों की ऑपरेशन के बाद की रिपोर्ट और उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट।
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कूनो नेशनल पार्क में निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की गई खनिज सामग्री का विवरण।
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चीता प्रोजेक्ट पर बनी डॉक्यूमेंट्री की अनुमति और चीता अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों व डॉक्टरों की जानकारी।
आरटीआइ नियमों के उल्लंघन का आरोप
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अजय दुबे ने आयोग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि चीता प्रोजेक्ट के प्रभारी उत्तम शर्मा ने आरटीआइ अधिनियम का गंभीर उल्लंघन किया है। याचिका में कहा गया कि अधिकारी ने खुद ही लोक सूचना अधिकारी (PIO) और प्रथम अपीलीय अधिकारी की भूमिका निभाते हुए मनमाने और गैर-कानूनी आदेश पारित किए।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के लागू होने के लगभग 21 वर्षों बाद भी इस तरह के नियमों की अनदेखी करने पर याचिकाकर्ता ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भारी जुर्माना लगाने, विभागीय जांच शुरू करने और क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की मांग की है।




